
रानियों की तरह जीने वाली मीना की जिंदगी में बहुत गम रहा है। वह सकून के दो पल न जी सकीं। नाम...शोहरत...पैसा सब होने के बाद भी 38 साल की उम्र में उनकी दर्दभरी मौत हो गई। शराब के नशे में डूबी मीना ने धीरे-धीरे नाम...पैसा...शोहरत और यहां तक अपना प्यार भी खो बैठी थीं। पति के जुल्मों ने मीना का दिल ही नहीं उनकी आत्मा तक को तोड़ दिया था। उनके अंदर इतना दर्द था कि फिल्मों में इमोशनल सीन के लिए एक्ट्रेस को ग्लिसरीन की जरूरत ही नहीं पड़ी।
मीना कुमारी (Meena Kumari)उस दौर की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस थीं। मधुबाला भी उनकी खूबसूरती की दीवानी थी। मीना का करियर तेज रफ्तार से भाग रहा था। तभी उनके हाथ एक बड़े डायरेक्टर की फिल्म आई।
बड़ी फिल्म मिलने की खुशी में मीना अपने होश ही खो बैठीं। फिल्म के डायरेक्टर की गंदी नियत उन्हें न दिखाई दी और न ही समझ में आई। वहीं निर्देशक ने एक्ट्रेस की नसमझी का फायदा उठाकर फिल्म पर बात करने के बहाने मीना के साथ अकेले लंच करने का प्लान बनाया।
इसके बाद जो हुआ मीना को उसने झकझोर कर रख दिया। एक्ट्रेस को अकेला देख डायरेक्टर ने धीरे-धीरे अशलील हरकतें करनी शुरू कर दीं। जैसे ही उसने मीना के हाथों को चूमा... वह असहज हो लगीं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस जोर-जोर से चिल्लाने लगीं।
मीना की आवाज सुनकर सभी लोग अंदर आ गए। मीना ने डायरेक्ट को सबके सामने जमकर मारा। डायरेक्ट ने धमकी देकर इस बात का जिक्र करने से सभी मना किया। इतना ही नहीं मीना कुमारी से बदला भी लिया। फिल्म की कहानी बदल कर उन्होंने एक्टर से सबके सामने सेट पर उन्हें 31 थप्पड़ लगवाए थे।
बचपन में पिता का गुस्सा...पति का आतंक और बाहर वालों की गंदी नजरों और जुल्मों ने मीना की आत्मा तक घायल हो चुकी थी। अपने इस दर्द को दुनिया से छिपाकर रखने के लिए उन्होंने शराब को अपना हमसफर बना लिया। मीना को नशे की ऐसी लत लग चुकी थी कि वह बिना शराब शिहर उठती थीं। घरवालों से छुपकर वह बाथरूम में डिटॉल की बोतल में शराब भरकर पीती थीं।
एक दौर ऐसा आया की उनके पास न खाने के पैसे और न इलाज के पैसे थे। कहा जाता है अपने आखिरी वक्त में मीना अस्पताल के 3500 रुपए तक नहीं चुका पाई थीं। उनका बिल डॉक्टर ने चुकाया था। एक्ट्रेस ने पाकीजा, बैजू बावरा, दिल एक मंदिर, मेरे दुश्मन, बहु बेगम सहित कई फिल्मों में शानदार काम किया है।