जांच के दौरान, पुलिस ने दो और लोगों – फ़ज़ले सिद्दीकी और मोहम्मद गुलफ़राज़ शेख – को उस नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ़्तार किया, जो मुंबई में मेफ़ेड्रोन की सप्लाई करता था। इस मामले में एक चार्जशीट दायर की गई थी। पुलिस लाविश की तलाश कर रही थी और उसके ख़िलाफ़ एक गैर-जमानती वारंट जारी करवाया था। शक था कि वह दुबई में छिपा हुआ है। आख़िरकार, 2 नवंबर को उसे दुबई से डिपोर्ट कर दिया गया और ANC ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, लाविश ने बताया कि वह कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर सलीम डोला के इशारे पर काम करता था, और उससे पूछताछ के आधार पर ANC सांगली में एक फ़ैक्ट्री तक पहुंची, जहां उसने दावा किया था कि मेफ़ेड्रोन बनाया जाता है। हालांकि, ANC को पता चला कि सांगली वाली फ़ैक्ट्री को तो क्राइम ब्रांच ने 2024 में ही पकड़ लिया था।