Raja Shivaji: छत्रपति शिवाजी महाराज बनने के लिए रितेश ने झोंकी जान, ढाल बनकर साथ खड़ी रहीं पत्नी जेनेलिया

Raja Shivaji: भारतीय सिनेमा के पर्दे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता को उतारना किसी भी कलाकार के लिए केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और भावनात्मक जिम्मेदारी होती है। अभिनेता और निर्देशक रितेश देशमुख अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'राजा शिवाजी' के साथ इसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं।

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 7:22 PM
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भारतीय सिनेमा के पर्दे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता को उतारना किसी भी कलाकार के लिए केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और भावनात्मक जिम्मेदारी होती है। अभिनेता और निर्देशक रितेश देशमुख अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'राजा शिवाजी' के साथ इसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान, रितेश ने फिल्म के निर्माण के दौरान आने वाली चुनौतियों और उन स्तंभों के बारे में खुलकर बात की, जिन्होंने उनके इस सपने को टूटने नहीं दिया।

पर्दे के पीछे का संघर्ष

रितेश ने बताया कि 'राजा शिवाजी' को बनाना उनके करियर का सबसे मुश्किल सफर रह है। एक भव्य ऐतिहासिक फिल्म होने के कारण, इसकी शूटिंग के लिए ऐसे दुर्गम स्थानों को चुना गया जहाँ पहुँचना ही अपने आप में एक उपलब्धि थी। उन्होंने साझा किया कि सह्याद्रि की पहाड़ियों और कठिन मौसम ने कई बार उनके हौसले की परीक्षा ली।

रितेश कहते हैं, "कई बार भारी बारिश और खराब मौसम के कारण हमारे सेट बह गए। दिनों की मेहनत घंटों में बर्बाद हो जाती थी, लेकिन पूरी यूनिट ने एक मिशन की तरह काम किया।" उन्होंने बताया कि जब वह शिवाजी महाराज की वेशभूषा में उन पहाड़ों पर खड़े होते थे, तो उन्हें खुद के तुच्छ होने का अहसास होता था। वह सोचते थे कि जिस रास्ते पर चलने में उन्हें आज इतनी कठिनाई हो रही है, महाराज ने उस दौर में उन्हीं पहाड़ों पर स्वराज्य की नींव रखी थी।


जेनेलिया और ज्योति देशपांडे

इस फिल्म के भव्य कैनवस को हकीकत में बदलने का श्रेय रितेश ने अपनी पत्नी और सह-निर्माता जेनेलिया देशमुख और जियो स्टूडियोज की ज्योति देशपांडे को दिया। रितेश के अनुसार, जब भी फिल्म के बजट या विजन को लेकर बाधाएं आईं, जेनेलिया एक ढाल बनकर खड़ी रहीं।

जेनेलिया ने रितेश को केवल उनके विजन पर ध्यान केंद्रित करने की आजादी दी। रितेश याद करते हैं, "जेनेलिया ने मुझसे कहा था कि तुम सिर्फ अपनी फिल्म पर ध्यान दो, जो तुम्हें चाहिए उसे उपलब्ध कराना मेरा काम है। अगर कभी हम किसी चीज का खर्च उठाने में असमर्थ होते, तो भी उन्होंने कभी 'ना' नहीं कहा, बल्कि उसे प्रबंधित करने का रास्ता निकाला।" वहीं, ज्योति देशपांडे और जियो स्टूडियोज के अटूट विश्वास ने फिल्म को वह पैमाना दिया जिसकी उसे जरूरत थी।

रितेश के लिए यह फिल्म केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक श्रद्धाजंलि है। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान पहाड़ों की ऊंचाई पर खड़े होकर जब वह नीचे की दुनिया को देखते थे, तो उन्हें उस महान व्यक्तित्व की दिव्यता का अहसास होता था जिसने पूरी दुनिया के सामने स्वाभिमान का उदाहरण पेश किया।

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