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Shabana Azmi: आइटम नंबर्स के लिरिक्स पर शबाना आज़मी ने कही बड़ी बात, बोलीं- कभी-कभी कुछ बोल उन्हें बेहद अनकंफर्टेबल कर देते हैं

Shabana Azmi: शबाना आज़मी ने फिल्मों में आइटम नंबर शामिल किए जाने पर रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि इनमें महिला अपना सारा नियंत्रण खो देती है और पुरुष की निगाहों के आगे सरेंडर कर देती है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Mar 12, 2026 पर 9:52 AM
Shabana Azmi: आइटम नंबर्स के लिरिक्स पर शबाना आज़मी ने कही बड़ी बात, बोलीं- कभी-कभी कुछ बोल उन्हें बेहद अनकंफर्टेबल कर देते हैं
आइटम नंबर्स के लिरिक्स पर शबाना आज़मी ने कही बड़ी बात

Shabana Azmi: अभिनेत्री शबाना आज़मी फिल्म इंडस्ट्री की कई समस्याओं पर मुखर रही हैं। सालों से उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर बात की है। अभिनेत्री मुंबई में आयोजित 'वी द वुमेन' कार्यक्रम में पहुंची थीं, जहां उन्होंने फिल्मों में आइटम नंबरों के प्रभाव पर अपने विचार साझा किए। आइटम नंबरों में आम तौर पर महिला अभिनेत्रियां जोशीले म्यूजिक पर डांस करती हैं और अक्सर इनमें सिड्यूसिंग सीन होते हैं।

आइटम नंबरों के बारे में बात करते हुए शबाना ने कहा, “सिनेमा की पहचान छवि से होती है। इसलिए जब आपके पास डिसकनेक्टेड इमेज होती हैं, जैसे कि उदाहरण के लिए, उभरता हुआ ब्रेस्ट या हिलती हुई बेली, तो आप उन्हें टुकड़ों में काटते हैं और कैमरा शरीर के चारों ओर कैसे घूमता है, यही निर्देशक के इरादे को निर्धारित करता है। मुझे लगता है कि एक आइटम नंबर में, एक महिला अपना सारा नियंत्रण खो देती है और पुरुष की निगाहों के सामने आत्मसमर्पण कर देती है।”

उन्होंने आगे कहा, “तो वो खुद को एक वस्तु की तरह पेश कर रही है, और वो जो गाने गा रही है उसके बोल… मुझे बेहद असहज लगते हैं और मैं इससे सहमत नहीं हूं। बहुत सी औरतें कहती हैं कि अगर मर्द ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों न करें? लेकिन अगर मर्द खुद को वस्तु की तरह पेश करने को तैयार हैं तो आपको क्यों सहमत होना चाहिए?

एक्ट्रेस ने कहा कि मुझे इस बात से बहुत आपत्ति है और ज्यादातर मामलों में इसका कहानी से कोई लेना-देना नहीं होता है। ये अपने आप में एक अलग बात है। फिर मुझे समाज की प्रतिक्रिया की चिंता सताती है, क्योंकि फिर आप ऐसे कार्यक्रमों में जाते हैं और वहां छोटे बच्चे 'चोली के पीछे क्या है' गा रहे होते हैं और सब उन पर हंस रहे होते हैं। कोई भी शब्दों पर ध्यान नहीं दे रहा होता और बस उनके साथ बह रहा होता है।

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