तुषार ने बताया, “मेरे माता-पिता की तरफ से मुझ पर कोई दबाव नहीं था क्योंकि मैंने उनसे कभी पूछने के बारे में सोचा ही नहीं। मैं 39 साल का था। मेरी मुलाकात प्रकाश झा से तिरुपति जाने वाली फ्लाइट में हुई। हम दोस्त तो नहीं थे, लेकिन एक-दूसरे को जानते थे। लौटते समय हमारी फ्लाइट कैंसिल हो गई और हमने कार से सफर किया। रास्ते में उन्होंने मुझसे पूछा, ‘अगर तुम्हारी किस्मत में शादी नहीं लिखी है, तो सिंगल पेरेंट बनने के बारे में क्यों नहीं सोचते?’ उनके परिवार में एक ऐसी महिला थी, जो लगभग उसी उम्र में मां बन चुकी थी। फिर मैंने डॉक्टरों से बात की। उन्होंने मुझे सलाह दी। हमने धीरे-धीरे कदम बढ़ाया और आखिरकार मैं पिता बन गया।