पिछले साल पूर्व अभिनेत्री जरीन खान का मुंबई स्थित घर में निधन हो गया, जिसने फिल्मी दुनिया और उनके चाहने वालों को गहरा झटका दिया। उनके बेटे जायद खान ने मां की अंतिम विदाई हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दी, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इस फैसले ने लोगों के बीच बहस को जन्म दे दिया, जहां कई लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाए, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत आस्था और परिवार के निर्णय के रूप में देखा। इस पूरे घटनाक्रम ने धर्म, परंपरा और व्यक्तिगत इच्छाओं को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी, जो लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रही।
धर्म को लेकर उठे सवालों पर क्या बोले जायद?
लोगों ने सवाल उठाया कि मुस्लिम परिवार से होने के बावजूद हिंदू रीति से अंतिम संस्कार क्यों किया गया। इस पर जायद खान ने साफ कहा कि उनके परिवार में धर्म से ज्यादा इंसानियत को महत्व दिया जाता है। उनके अनुसार, हर व्यक्ति का धर्म व्यक्तिगत मामला है, जिस पर बहस करना सही नहीं।
परिवार की सोच: इंसानियत सबसे ऊपर
जायद ने बताया कि उनके घर में अलग-अलग धर्म और बैकग्राउंड के लोग काम करते हैं, लेकिन सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। उनका परिवार खुद को सेक्युलर मानता है और किसी एक धर्म को श्रेष्ठ नहीं मानता।
भावुक कर देने वाली आखिरी ख्वाहिश
इंटरव्यू के दौरान जायद अपनी मां की आखिरी इच्छा याद कर भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उनकी मां चाहती थीं कि उनकी अस्थियों को एक सुंदर नदी में प्रवाहित किया जाए, ताकि उन्हें “मुक्ति” मिल सके।
81 साल की उम्र में हुआ निधन
7 नवंबर को 81 वर्ष की उम्र में जरीन खान का निधन हुआ था। उम्र संबंधी बीमारियों के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। पारसी मूल की होने के बावजूद, उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिंदू रीति से अंतिम संस्कार किया गया।
फिल्मी दुनिया से जुड़ा रहा सफर
जरीन खान ने देव आनंद के साथ फिल्म ‘तेरे घर के सामने’ (1963) में काम किया था। बाद में उन्होंने संजय खान से शादी की और उनके परिवार में बेटा जायद और बेटियां सुजैन, फराह और सिमोन शामिल हैं।