Budget 2026 Expectations for HealthCare Sector: इस बार 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष 2027 का बजट पेश करेंगी तो हेल्थकेयर सेक्टर को बजट में हल्की-फुल्की बढ़ोतरी की बजाय स्ट्रक्चरल बदलाव की उम्मीद रहेगी। हेल्थकेयर सेक्टर का मानना है कि भारत को अपनी मौजूदा दिशा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत स्वास्थ्य पर तय जीडीपी के 2.5% खर्च के बीच की खाई को पाटना होगा। बता दें कि वित्त वर्ष 2025 में हेल्थकेयर सेक्टर के लिए शुरुआती आवंटन ₹87,657 करोड़ था, जो FY26 में 9.46% बढ़कर करीब ₹95,958 करोड़ हो गया लेकिन इसके बावजूद हेल्थ पर पब्लिक एक्सपेंडिचर अब भी 2% से नीचे बना हुआ है। वर्ष 2047 तक $50 हजार करोड़ के वैल्यूएशन के लक्ष्य को देखते हुए हेल्थकेयर इंडस्ट्री का मानना है कि बजट में एक बूस्टर डोज देना होगा।
Budget 2026 Expectations: मेट्रो शहरों के बाहर गांवों तक प्रोत्साहन देने की मांग
इस बार हेल्थकेयर सेक्टर को बजट से डीसेंट्रलाइजेशन की उम्मीद है। अभी इस सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का झुकाव टियर-1 शहरों की तरफ अधिक है लेकिन अब इस सेक्टर्स को उम्मीद है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों और गांवों में इंफ्रा डेवलपमेंट के लिए सरकारी प्रोत्साहन मिलेगा। प्रकाश हॉस्पिटल के सीएमडी डॉ वीएस चौहान का कहना है कि बजट में सस्ती दरों पर फंडिंग, प्रस्तावों को फटाफट मंजूरी और रियलस्टिक रीइंबर्मसमेंट स्ट्रक्चर पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत पेमेंट में देरी से छोटे शहरों में जरूरी इंफ्रा डेवलपमेंट सीमित हो जाती है।
उनका कहना है कि PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के लिए नए इंसेंटिव की उम्मीद है जिससे प्राइवेट सेक्टर की खूबियों का इस्तेमाल कर दूर-दराज के इलाकों में सेकंडरी केयर फैसिलिटी को मैनेज किया जा सके। इंडस्ट्री बॉडी नाथहेल्थ (NATHEALTH) ने रीजनल हॉस्पिटल्स की लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग के लिए एक हेल्थकेयर इंफ्रा फंड बनाने का प्रस्ताव रखा है।
Budget 2026 Expectations: इन योजनाओं का दायरा बढ़ाने की मांग
भारत में मरीजों के आउट-ऑफ-पॉकेट (OOP) खर्च को कम करने में अच्छी-खासी प्रगति हुई है। यह खर्च 2014-15 में 62.6% से घटकर 2021-22 में 39.4% रह गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह गिरावट मुख्य रूप से 1.76 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और पीएमजेएवाई बीमा योजना का दायरा बढ़ने के चलते हुई है। आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च का मतलब जो अपनी जेब से खर्च करना होता है यानी कि यह इंश्योरेंस पॉलिसी के दायरे से बाहर का खर्च है। इस खर्च को कम करने के लिए अब आम लोगों और इंडस्ट्री की मांग है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) का दायरा बढ़ाया जाए। हाल ही में इस योजना का दायरा बढ़ाकर 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को शामिल किया गया है, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
सरकार से यह भी मांग की जा रही है कि हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम और दवाओं पर GST को घटाया जाए। साथ ही बेनेफेशियरी बेस को बढ़ाने और हर परिवार पर इंश्योरेंस कवर को बढ़ाने की बी मांग की जा रही है। हेल्थकेयर इंडस्ट्री की मांग है कि मेडिकल डिवाइसेज पर इंवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर्स को सुधारने और अस्पतालों की लागत घटाने के लिए एक समान 5% जीएसटी की मांग की जा रही है।
इंडस्ट्री की मांग है कि प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप्स की टैक्स डिडक्शन लिमिट को मौजूदा ₹5000 से बढ़ाकर और ऊपर किया जाना चाहिए। इससे फायदा यह होगा कि रूटीन चेकअप को बढ़ावा मिलेगा और बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकेगा। अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रमोटर डायरेक्टर शोभना कामिनेनी ने इसे लेकर “प्रिवेंशन-फर्स्ट हेल्थकेयर सिस्टम” की पैरवी की है।
भारत ने कालाजार (Kala Azar) को खत्म करने को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है और सभी ब्लॉक्स में 10 हजार की जनसंख्या पर एक से कम मामले सामने आए। हालांकि टीबी के मोर्चे पर अभी काफी लड़ाई बाकी है। वर्ष 2015 से वर्ष 2023 के बीच टीबी के मरीज 17.7% घटे हैं और यह घटकर प्रति लाख 195 पर आ गई, लेकिन अब भी 2025 तक प्रति लाख 44 मामलों के लक्ष्य से काफी दूर है। हेल्थ इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इस अंतर को पाटने के लिए बजट में नि-क्षय पोषण योजना (Ni-kshay Poshan Yojana) का आवंटन बढ़ाया जाएगा।