Covid 19 New Variant Cicada: कोविड 19 की महामारी से उबर रही दुनिया में कोरोना वायरस का एक नया सब वेरिएंट मिलने से एक बार फिर हलचल मच गई है। इस सब वेरिएंट को BA.3.2 के नाम से जाना जाता है, जिसे सिकाडा निकनेम दिया गया है। कोरोना का ये नया सब वेरिएंट सिकाडा अमेरिका में तेजी से अपना पैर पसार रहा है। ओमिक्रॉन फैमिली से जुड़ा BA.3.2 सब वेरिएंट दुनिया के लिए नया नहीं है। इसे सबसे पहले 2024 के आखिर में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। दुनिया भर के कम से कम 23 देशों में इसके मामले मिलने की खबर है। हालांकि, यह अभी तक दुनिया भर में सबसे ज्यादा फैलने वाला स्ट्रेन नहीं बना है।
सितंबर 2025 में इसके मामले बढ़ने की खबरें आई थीं। इसके बाद से ही दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां इसकी हरकत पर नजर रख रही हैं। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, कोरोना का यह नया सब वेरिएंट कोविड 19 वैक्सीन से मिली सुरक्षा को चकमा देने में सक्षम है। अमेरिका में सबसे पहले इसके संकेत चार यात्रियों के नेजल स्वैब में मिले थे। इसके बाद ये यहां के 29 राज्यों के मरीजों और वेस्टवॉटर सिस्टम में पाया जा चुका है।
सिकाडा वेरिएंट की कड़ी निगरानी कर रहा डब्लूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) BA.3.2 यानी सिकाडा पर कड़ी नजर रख रहा है। डब्लूएचओ ने इसे वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग नाम दिया है। यानी इस पर यह देखने के लिए कड़ी नजर रखी जा रही है कि यह और ज्यादा खतरनाक होता है या नहीं। हालांकि, अभी इसे पिछले खतरनाक वेरिएंट की तरह कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।
इसे सिकाडा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ऐसा लगता है कि यह अचानक फिर से उभरने से पहले सालों तक चुपचाप विकसित हुआ था। यह पुराने BA.3 वंश से आया है जो 2022 की शुरुआत में पाया गया था।
सिकाडा वेरिएंट के लक्षण काफी हद तक पिछले ओमिक्रॉन स्ट्रेन जैसे ही हैं, जो मुख्य रूप से ऊपरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करते हैं।
क्या वैक्सीनेशन मददगार है?
यह वेरिएंट मौजूदा JN.1 और LP.8.1 वंश के लिए डिजाइन वैक्सीन से कम प्रभावित हो सकता है। हालांकि, शोधकर्ता अब भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वैक्सीनेशन गंभीर बीमारी और मौत से मजबूत सुरक्षा देती है।
डब्लूएचओ के मुताबिक, BA.3.2 वेरिएंट ने ज्यादा ग्रोथ नहीं दिखाई है। यह अभी भी दुनिया भर में दुर्लभ है। फिलहाल, इस वेरिएंट से जुड़ी बीमारी की गंभीरता बढ़ने की कोई रिपोर्ट नहीं है। भारत में, घबराने की जरूरत नहीं है। अभी तक, BA.3.2 से जुड़े इन्फेक्शन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। दुनिया भर में सामने आए ज्यादातर मामले सामान्य देखभाल से ठीक हो गए।