US-Iran Tension: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण समुद्र में तनाव चरम पर है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी के बाद, कम से कम 37 भारतीय झंडे वाले जहाज और 1,109 चालक दल के सदस्य इस खतरनाक क्षेत्र में फंस गए हैं।
'इंडियन नेशनल शिपओनर्स एसोसिएशन' (INSA) ने पुष्टि की है कि भारतीय जहाज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें से कुछ जहाज पूरी तरह सामान से लदे हुए हैं, जबकि कुछ माल भरने का इंतजार कर रहे हैं। एसोसिएशन ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाया जा सके। उन्होंने चार्टरर्स से भी अपील की है कि वे भारतीय क्रू और संपत्ति की सुरक्षा के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करें।
ईरान ने नाकेबंदी कर दी थी हमले की चेतावनी
2 मार्च को IRGC ने ऐलान किया था कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा, उस पर हमला किया जाएगा। इस धमकी के कारण इस व्यस्त समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की जीवनरेखा की तरह है। इसकी नाकेबंदी भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकती है। भारत अपनी जरूरतों का करीब 46% कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगवाता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत के कुल आयात का लगभग 20%, जिसमें खाद्य पदार्थ, रसायन और बुलियन शामिल हैं, इसी रूट पर निर्भर है। माल ढुलाई और समुद्री बीमा की बढ़ती लागत के कारण आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।
हालांकि सरकार ने अभी तक किसी विशेष रेस्क्यू प्लान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन समुद्री अधिकारी स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रहे हैं। 1,000 से अधिक भारतीय नाविकों की मौजूदगी ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। वैसे मिडिल ईस्ट में छिड़ा यह युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत जैसे देशों की सप्लाई चेन और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।