होर्मुज में फंसे 6 जहाजों पर 3 लाख टन एलपीजी को निकालने की कवायद तेज, खत्म होगी रसोई गैस की किल्लत!

LPG Carriers Cargoes: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण होर्मुज से जहाजों का गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया था, जिससे भारत में रसोई गैस की सप्लाई चेन टूटने का डर पैदा हो गया। फिलहाल 6 एलपीजी जहाज, जिनमें करीब 3 लाख टन ईंधन लदा है हफ्तों से खाड़ी क्षेत्र में लंगर डाले खड़े है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 11:18 AM
Story continues below Advertisement
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण भारत की एलपीजी आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है

LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज में फंसे भारतीय एलपीजी जहाजों को निकालने के प्रयासों में बड़ी सफलता मिली है। भारत सरकार और कूटनीतिक चैनलों की सक्रियता से 6 एलपीजी टैंकरों को निकालने की कवायद हो रही है जिससे घरेलू बाजार में रसोई गैस की किल्लत दूर होने की उम्मीद जगी है।

6 जहाजों में फंसा है 3 लाख टन ईंधन

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण फारस की खाड़ी में भारत की एलपीजी आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। युद्ध के कारण होर्मुज के इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया था, जिससे भारत में रसोई गैस की सप्लाई चेन टूटने का डर पैदा हो गया था। फिलहाल 6 एलपीजी जहाज, जिनमें लगभग 3 लाख टन ईंधन लदा है, हफ्तों से खाड़ी क्षेत्र में लंगर डाले खड़े है।


ईरान से 2 जहाजों को मिली 'स्पेशल क्लीयरेंस'

भारत की निरंतर कूटनीतिक कोशिशों के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चुनिंदा जहाजों को रास्ता देने पर सहमति जताई है। बीते दिन 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' नामक दो बड़े टैंकरों को क्लीयरेंस मिल गई और वे होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन दो जहाजों के जल्द ही भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे बाजार में स्थिरता आएगी। हफ्तों से रुकी हुई सप्लाई बहाल होने से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

यह भी पढ़ें- 'जब तक पाबंदियां नहीं हटतीं, तब तक जारी रहेगी जंग', ईरान ने अमेरिका से की हर्जाने की भी डिमांड

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस रास्ते से गुजरने के लिए जहाजों को ईरान द्वारा निर्धारित एक स्पेशल रूट का पालन करना पड़ रहा है और हर कदम पर अनुमति लेनी है। भारत अभी भी अपने सभी जहाजों के लिए व्यापक आश्वासन पर बातचीत कर रहा है, लेकिन फिलहाल महत्वपूर्ण खेपों के लिए 'केस-बाय-केस' आधार पर मंजूरी मिल रही है।

वैकल्पिक रूट की तलाश के साथ बढ़ाया जा रहा है घरेलू उत्पादन

केवल आयात पर निर्भर न रहकर, भारत सरकार ने 'प्लान-बी' पर भी काम शुरू कर दिया है। तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। भारत अब अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर उन वैकल्पिक रूटों और देशों की तलाश कर रहा है, जहां से बिना किसी रुकावट के गैस मंगवाई जा सके।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।