Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच बीते दिन ट्रंप ने पांच दिनों के लिए हमले रोकने का ऐलान किया। उन्होंने दावा किया कि सुलह को लेकर ईरान के साथ बातचीत जारी है। हालांकि, ईरान ने अपनी शर्तें दोहराते हुए साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान पर लगी सभी आर्थिक पाबंदियां नहीं हटाई जातीं और अमेरिका युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई नहीं करता, तब तक यह जंग जारी रहेगी।
ईरान ने इस संकट को खत्म करने के लिए तीन बड़ी मांगें रखी हैं:
पाबंदियों की समाप्ति: ईरान का कहना है कि उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।
हर्जाने का भुगतान: ईरान ने मांग की है कि अमेरिका को युद्ध के दौरान हुए बुनियादी ढांचे और जान-माल के नुकसान का मुआवजा देना होगा।
हस्तक्षेप न करने की गारंटी: मोहसिन रजा ई ने कहा कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी गारंटी चाहिए कि अमेरिका उसके आंतरिक मामलों में कभी दखल नहीं देगा। उन्होंने जोर दिया कि यह निर्णय ईरान की जनता, सशस्त्र बलों और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का है।
ट्रंप का 'डिप्लोमेसी' कार्ड और 5 दिन का युद्ध विराम
ईरान का यह कड़ा रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने सुलह के संकेत दिए थे। ट्रंप ने दावा किया था कि पिछले दो दिनों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच 'बहुत अच्छी और फलदायी' बातचीत हुई है। ट्रंप ने बातचीत का मौका देने के लिए ईरान के बिजली घरों और ऊर्जा केंद्रों पर होने वाले संभावित हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का आदेश दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि यह बयान ट्रंप के उस 48 घंटे के अल्टीमेटम के ठीक बाद आया, जिसमें उन्होंने होर्मुज न खुलने पर ईरान के पॉवर प्लांट्स को 'मिटा देने' की धमकी दी थी।
तेहरान ने खारिज की बातचीत की खबरें
ईरान ने ट्रंप के बातचीत के दावों को पूरी तरह से 'फेक न्यूज' करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। ट्रंप प्रशासन तेल और वित्तीय बाजारों को शांत करने के लिए झूठ का सहारा ले रहा है।ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने कहा कि ईरानी जनता केवल बातचीत नहीं, बल्कि 'हमलावरों को कड़ी और पछतावे वाली सजा' चाहती है।
ईरान का कहना है कि जब तक उसके क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इस रास्ते के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें $115 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है।