Digital Arrest Fraud: तेलंगाना में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से ठगी, जालसाजों ने ऐंठे ₹82 लाख

Digital Arrest Fraud: तेलंगाना के महबूबबाद में रहने वाले एक रिटायर्ड शिक्षक "डिजिटल अरेस्ट" नामक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए और उनसे 82 लाख रुपये ठग लिए गए। जालसाजों ने खुद को टेलीकॉम और सीबीआई अधिकारी बताकर दंपति को गिरफ्तारी की धमकी दी।

अपडेटेड May 09, 2026 पर 11:04 AM
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तेलंगाना में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से ठगी

Digital Arrest Fraud: तेलंगाना के महबूबबाद में रहने वाले एक रिटायर्ड शिक्षक "डिजिटल अरेस्ट" नामक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए और उनसे 82 लाख रुपये ठग लिए गए। जालसाजों ने खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर दंपति को फर्जी केस और गिरफ्तारी की धमकी दी।

धोखाधड़ी की शुरुआत 11 अप्रैल को हुई, जब शिक्षक की पत्नी को एयरटेल अधिकारी होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने चेतावनी दी कि रिटायर्ड शिक्षक का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा क्योंकि उनके आधार कार्ड से कथित तौर पर उत्पीड़न के 17 मामले जुड़े हुए हैं।

ठग ने खुद को बेंगलुरु का SI बताया


इसके बाद, एक पुलिस वर्दी पहने हुए ठग ने खुद को बेंगलुरु का सब-इंस्पेक्टर बताते हुए WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए दंपति को जोड़ा। उसने झूठा दावा किया कि शिक्षक के आधार कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल करके मुंबई के एक केनरा बैंक में अकाउंट खोला गया है और उसमें एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़े 75 लाख रुपये जमा किए गए हैं।

धोखाधड़ी करने वालों ने एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया, जिसमें दंपति को तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" में रखा गया था और उन्हें चेतावनी दी गई थी कि वे इस मामले को किसी को न बताएं। सीबीआई अधिकारी बनकर एक अन्य आरोपी ने इस दौरान पीड़ितों को बार-बार धमकाया।

रिटायर्ट शिक्षक ने ठगों के खातों में पैसे किए ट्रांसफर

रिटायर्ड शिक्षक और उनकी पत्नी ने अपनी जीवनभर की बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट और यहां तक कि लोन की रकम भी ठगों द्वारा दिए गए खातों में ट्रांसफर कर दी।

पीड़ितों ने 15 अप्रैल को 49 लाख रुपये, 18 अप्रैल को 22.22 लाख रुपये और 22 अप्रैल को 11.22 लाख रुपये RTGS के जरिए ठगों के खातों में भेजे।

साइबर अपराधियों ने दंपति को आश्वासन दिया कि 2 मई तक "कानूनी वेरिफिकेशन" के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। हालांकि, आरोपियों ने 3 मई से अपने फोन बंद कर दिए और कोई जवाब नहीं दिया। ठगे जाने का एहसास होने पर दंपति ने पुलिस से संपर्क किया और महबूबबाद टाउन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस उपाधीक्षक तिरुपति राव ने कहा, "पीड़ितों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर अपराधियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के प्रयास जारी हैं।"

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