Ahmedabad plane crash :अहमदाबाद विमान हादसे के बाद से हवाई यात्रा में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। इस बीच बुरी खबर ये है कि DGCA खुद स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। करीब आधे पद खाली हैं। भर्तियों की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इसमें अभी वक्त लगेगा। एविएशन रेगुलेटर DGCA के सामने चुनौती सिर्फ एविएशन की निगरानी की नहीं है। बल्कि खुद स्टाफ की कमी की भी है। सवाल ये है कि जब निगरानी करने वाला स्टाफ ही नहीं होगा तो आखिर निगरानी कैसे होगी।
1 जुलाई 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि DGCA में 1644 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 821 पद भरे हुए हैं। कुल 823 यानी करीब 50 फीसदी पोस्ट पर अब भी भर्ती नहीं हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि Group A Technical Officers के 1063 पदों में से 540 खाली हैं। इन्हीं अफसरों पर विमानों की जांच, सुरक्षा ऑडिट और एयरलाइन सर्टिफिकेशन जैसे अहम जिम्मेदारियां होती हैं।
DGCA की आंतरिक रिपोर्ट बताती है कि भर्ती प्रक्रिया में 2 से 3 साल लग जाते हैं। इसके अलावा। लिमिटेड टैलेंट पूल भी एक चुनौती है। DGCA ने डेप्युटेशन के जरिए 79 पद भरने की कोशिश की लेकिन सिर्फ 1 अफसर ने जॉइन किया है। वजह यह है कि DGCA उतनी तनख्वाह और भत्ते नहीं दे सकता जितना AAI या पवन पंस जैसे PSU देते हैं। फिलहाल 190 टेक्निकल पदों की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 116 पदों को प्रोमोशन और डेप्यूटेशन के भरने की कोशिश की जा रही है। डेप्युटेशन पर भर्ती की कोशिश नाकाम रही है।
इस मुद्दे पर सिविल एविएशन मंत्री के राम मोहन नायडू ने कहा "इस साल के अंत तक, हमारा लक्ष्य अक्टूबर तक 190 पदों पर भर्ती करना है। हम जल्द ही इनमें से लगभग 90 फीसदी रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया में हैं"।
अनुमान के मुताबिक 2032 कर DGCA को 900 और अधिकारियों की जरूरत होगी। लेकिन सही टैलेंट की कमी के चलते ये लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा। देश का एविएशऩ बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें सुरक्षित बनाए रखने वाले अफसरों की संख्या पूरी नहीं है। DGCA भरपाई की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस रफ्तार को और बढ़ाने की जरूरत है।
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