Ajit Pawar Plane Crash: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पलटवार करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार (26 जनवरी) को कहा कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार और चार अन्य लोगों को ले जा रहे विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना एक हादसा था। इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए। शरद पवार ने पत्रकारों से कहा कि अजीत की मौत महाराष्ट्र के लिए एक बड़ा सदमा है, जिसने एक मेहनती और कुशल नेता को खो दिया है।
पवार ने कहा कि यह क्षति अपूरणीय है। उन्होंने कहा, "सभी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं।" NCP (एसपी) प्रमुख ने कहा, "कोलकाता से यह अफवाह फैली कि इस घटना में कुछ राजनीति हो सकती है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। इससे राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। यह एक दुर्घटना थी। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इसमें राजनीति को न घसीटें।"
ममता बनर्जी ने अजीत पवार की मौत की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। आरोप लगाया है कि अन्य सभी एजेंसियां पूरी तरह से अपनी शुचिता खो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा तंत्रों के माध्यम से सच्चाई सामने नहीं आएगी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में की गई जांच ही विश्वसनीय होगी।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी ममता बनर्जी द्वारा की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता के शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए। तब वह ओछी राजनीति कर रही हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए बीजेपी के सह-प्रभारी बिप्लब देव ने पीटीआई से कहा, "उन्होंने (ममता बनर्जी ने) मानवता खो दी है।"
वहीं, बनर्जी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री देव ने कहा, "यह राजनीति करने का समय नहीं है, बल्कि अजित पवार के शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े होने का समय है।" BJP नेता ने कहा कि अजीत पवार के परिवार ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। वे ऐसी घटिया राजनीति नहीं कर रहे हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने कहा, "ममता बनर्जी को पवार के दुर्भाग्यपूर्ण निधन पर असंवेदनशील टिप्पणी करने के बजाय पश्चिम बंगाल में अग्निकांड पीड़ितों के परिवारों को न्याय और समय पर राहत सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।"
कोलकाता के नजीराबाद में 25-26 जनवरी की दरमियानी रात दो गोदामों में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई थी। ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए बीजेपी की असम इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने उन पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही उनसे इस तरह की राजनीति बंद करने की मांग की।