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'राजनीति में सीधे और ईमानदार होने की एक कीमत चुकानी पड़ती है' प्लेन क्रैश में अजित पवार के निधन पर बोले राज ठाकरे

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि राजनीति में सीधे और ईमानदार होने की एक कीमत चुकानी पड़ती है, और यह बात वह खुद के अनुभव से जानते हैं। बारामती में हुए विमान हादसे में NCP प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कुछ घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 28, 2026 पर 8:37 PM
'राजनीति में सीधे और ईमानदार होने की एक कीमत चुकानी पड़ती है' प्लेन क्रैश में अजित पवार के निधन पर बोले राज ठाकरे
Ajit Pawar Plane Crash: प्लेन क्रैश में अजित पवार के निधन पर बोले राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा है कि ऐसे समय में, जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, अजित पवार का निधन महाराष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ा और दुखद नुकसान है। राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार बेहद साफ-गोई वाले नेता थे। जो काम नहीं हो सकता था, वह साफ मना कर देते थे और जो काम संभव होता था, उसमें पूरी ताकत लगा देते थे। लोगों से झूठे वादे करना या भीड़ जुटाकर राजनीति करना उनकी शैली नहीं थी।

उन्होंने कहा कि राजनीति में सीधे और ईमानदार होने की एक कीमत चुकानी पड़ती है, और यह बात वह खुद के अनुभव से जानते हैं। बारामती में हुए विमान हादसे में NCP प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कुछ घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

राज ठाकरे ने लिखा, “मेरे दोस्त और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे। महाराष्ट्र की राजनीति ने एक बेहतरीन नेता खो दिया है। अजित पवार और मैंने लगभग एक ही समय में राजनीति में कदम रखा था, हालांकि हमारी जान-पहचान बाद में हुई। लेकिन राजनीति के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बहुत आगे पहुंचाया। पवार साहेब की परंपरा से आने के बावजूद, अजित पवार ने अपनी अलग पहचान बनाई और उसे महाराष्ट्र के हर कोने में पहुंचाया।”

उन्होंने आगे लिखा कि 1990 के दशक में महाराष्ट्र में शहरीकरण तेजी से बढ़ा। गांव अर्ध-शहरी बनने लगे, लेकिन वहां की राजनीति अब भी ग्रामीण सोच वाली थी, जबकि समस्याएं शहरी होती जा रही थीं। अजित पवार को इस तरह की राजनीति की गहरी समझ थी। पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती इसके बड़े उदाहरण हैं। इन दोनों क्षेत्रों का विकास ऐसा था कि उनके राजनीतिक विरोधी भी इसे मानते थे।

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