Ajit Pawar Profile: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की बारामती में प्लेन लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई। चार मुख्यमंत्रियों- पृथ्वीराज चह्वण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र में सबसे लंबे समय तक डिप्टी सीएम का पद संभालने वाले अजीत पवार का अपने राज्य की राजनीति में करीब चार दशकों तक अच्छा-खासा दखल रहा है। अपने समर्थकों के बीच वह 'दादा' के रूप में मशहूर थे। 'दादा' का मतलब बड़ा भाई। पहली बार उन्होंने 1982 में उन्होंने चुनावी जीत का स्वाद चखा, जब वह कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने गए। उसके बाद से इस्तीफे और पक्ष-विपक्ष; हर तरीके से न सिर्फ राज्य बल्कि केंद्र की राजनीति पर प्रभाव डाला। उनकी मौत के बाद उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके दो बच्चे जय और पार्थ पवार हैं। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं।
शरद पवार के लिए सांसदी छोड़ने से लेकर शरद पवार के विरोध तक
एनसीपी में अपने चाचा शरद पवार के कदमों पर चलते हुए अजीत पवार ने 1982 में कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में जगह बनाकर चुनावी राजनीति में एंट्री की। इसके बाद वर्ष 1991 में वह पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए और अगले 16 वर्षों तक इस पद पर बने रहे। इस दौरान पहली बार बार 1991 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट से जीत हासिल कर वह लोकसभा पहुंचे। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी सीट छोड़ दी ताकि अपने चाचा शरद पवार के लिए जगह बना सकें जिसके बाद पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में शरद पवार रक्षा मंत्री बने थे। खास बात ये है कि जिन शरद पवार के लिए अजीत पवार ने अपनी सांसदी छोड़ दी, उन्हीं के खिलाफ वर्ष 2019 से रास्ता अलग कर विरोधी दल से जुड़ गए।
अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के आशाताई पवार और अनंतराव पवार के घर पर हुआ था। महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके शरद पवार उनके चाचा हैं। अजीत पवार के शिक्षा की बात करें तो उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की लेकिन अपने पिता की मौत के उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया। वर्ष 1982 में उन्होंने कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में जगह बनाई। वर्ष 1991 में वह पुणे डिस्ट्रिकल सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन बने। वर्ष 1991 में ही उन्होंने बारामती संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की लेकिन फिर बाद में अपने चाचा शरद पवार के लिए इस्तीफा दे दिया जोकि बाद में नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने।
अजीत पवार ने केंद्र की राजनीति छोड़ राज्य का रुख किया और वर्ष 1991 के उपचुनाव में जीत हासिल की और फिर लगातार पांच बार और 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी जीते। कुल मिलाकर उन्होंने सात बार महाराष्ट्र विधानसभा में जगह बनाई। वर्ष 1991-92 तक सुधाकरराव नाइक की सरकार में वह एग्रीकल्चर और पावर स्टेट मिनिस्टर बने। वर्ष 1992 में अपने चाचा शरद पवार की सरकार में उन्होंने सॉइल कंजर्वेशन, पावर एंड प्लानिंग मिनिस्ट्री संभाली। वर्ष 1999 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में वह सिंचाई विभाग के कैबिनट मिनिस्टर बने। बाद में वर्ष 2003 में सुशीलकुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास विभाग मिला। वर्ष 2004 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की जीत के बाद विलासराव देशमुख और अशोक चह्वण की सरकार में वाटर रिसोर्सेज मिनिस्ट्री संभाला।
इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अहम मोड़ तब आया, जब 23 नवंबर 2019 को एनसीपी से दलबदल कर वह बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री बन गए। हालांकि देवेंद्र फडणवीस की यह सरकार 80 घंटे से भी कम समय में गिर गई और बाद में वह एनसीपी में लौट भी आए। इसके बाद महाविकास अघाड़ी की उद्धव ठाकरे की सरकार में उन्होंने डिप्टी सीएम का पद संभाला। वर्ष 2022 में शिवसेना में फूट के चलते उद्धव सरकार गिर गई और एकनाथ शिंदे की सरकार बनी और विपक्ष के नेता अजीत पवार बने। हालांकि वह फिर बाद में एनसीपी में फूट पड़ी और वह भाजपा-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए और डिप्टी सीएम बने।