संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्य डीलिमिटेशन को लेकर गलत कहानी बना रहे हैं। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि डीलिमिटेशन के बाद दक्षिण के राज्यों को भी फायदा होगा। विपक्ष आज पेश किए गए संवैधानिक संशोधन बिलों का पुरजोर विरोध कर रहा है। विपक्ष ने साफ कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार की डीलिमिटेशन को आरक्षण के साथ जोड़ने की कोशिश 2029 के चुनावों के लिए लोकसभा की सीटों में सेंध लगाने की चाल है।
विपक्ष की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि 2011 की जनगणना के आधार पर आबादी के हिसाब से डीलिमिटेशन करने से दक्षिण के राज्य संसद में किनारे पर धकेल दिए जाएंगे, जबकि हिंदी पट्टी (उत्तर भारत) की ताकत और बढ़ जाएगी।
विपक्ष का कहना है कि यह संघीय ढांचे के सिद्धांत के खिलाफ है, जिसमें हर राज्य को संसद में बराबर महत्व और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
सरकार ने इन आशंकाओं से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि सीटों में प्रस्तावित 50 प्रतिशत बढ़ोतरी से दक्षिण के हर राज्य को ज्यादा सीटें मिलेंगी।
अमित शाह ने आज उदाहरण देते हुए बताया कि डीलिमिटेशन के बाद:
यहां तक कि जिन राज्यों ने आबादी को अच्छे से कंट्रोल किया है, उन्हें भी फायदा मिलेगा:
यानि कुल मिलाकर हर राज्य को सीटों में बढ़ोतरी मिलेगी और संसद में उनकी हिस्सेदारी भी बनी रहेगी।
महाराष्ट्र, जो उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजता है, उसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।
विपक्ष एकजुट रहा तो बढ़ सकती है सरकार की मुश्किल!
महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार की योजना है कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर डीलिमिटेशन किया जाए और फिर सीटों की कुल संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाकर लोकसभा की सीटें 850 कर दी जाएं।
विपक्ष ने कहा है कि अगर सरकार महिला आरक्षण बिल को डीलिमिटेशन से अलग कर दे, तो वे अपना विरोध वापस ले लेंगे।
संसद के आंकड़ों से लगता है कि अगर विपक्ष एकजुट रहा तो सरकार मुश्किल में पड़ सकती है। संवैधानिक संशोधन बिल के लिए हर सदन में मौजूद और वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।
लोकसभा की मौजूदा प्रभावी सदस्य संख्या 541 है, इसलिए दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए। सत्तारूढ़ NDA के पास 293 सदस्य हैं, यानी उसे अभी भी 67 वोटों की कमी है।
राज्यसभा में जादुई आंकड़ा 163 है, जबकि NDA के पास 142 से थोड़े ज्यादा सदस्य हैं, यानी उसे 21 वोटों की कमी है।