आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गई है। दक्षिण 24 परगना के भांगड़ इलाके में तृणमूल कांग्रेस विधायक शौकत मोल्ला की कार को निशाना बनाकर बम फेंकने की घटना सामने आई है। यह घटना उस समय हुई जब वे पोलरहाट बाजार इलाके से लौट रहे थे।
TMC विधायक शौकत मोल्ला की कार पर बम हमला
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, देर रात उनकी गाड़ी पर बम फेंका गया। हालांकि इस हमले में वें सुरक्षित बच गए। अगली सुबह पोलरहाट पुलिस स्टेशन के पास खेत से कई जिंदा बम भी बरामद किए गए, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बम स्क्वॉड की मदद से विस्फोटक हटाए।
पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, साथ ही पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि शौकत मोल्ला को पहले से सुरक्षा मिली हुई है, इसके बावजूद इस तरह का हमला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लालबाजार को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है और भांगड़ डिवीजन में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर ISF समर्थित असामाजिक तत्वों का हाथ होने का आरोप लगाया है। शौकत मोल्ला ने बताया कि, "वें तृणमूल नेता खैरुल इस्लाम पर हुए हमले के बाद उनसे मिलने गये थे, और उनके घर से लौट ही रहे थे की उनकी गाड़ी पर यह हमला हुआ।" उन्होंने इस घटना के आरोप ISF पर लगाए हैं और शिकायत भी दर्ज कराई है।
वहीं दूसरी ओर ISF नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी घटना राजनीतिक ड्रामा भी हो सकती है। ISF अध्यक्ष नौशाद सिद्दीकी ने कहा, "इस घटना की जांच होनी चाहिए। अगर ज़रूरी हो, तो NIA से भी जांच करवाई जाए। बम धमाका कौन कर रहा है? वह अपने ही दो लोगों से अपनी कार पर बम फेंक रहा है। वह कहेगा, यह हो रहा है, वह मेरी सिक्योरिटी है, यह मेरे साथ हो रहा है, यह मेरे साथ हो रहा है, यह पार्टी के साथ हो रहा है। अपनी इमेज बनाए रखने के लिए और मीडिया में आने के लिए।" ISF की ओर से दावा किया का रहा है कि तृणमूल खुद सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।
बता दे कि इससे पहले भी इलाके में तृणमूल नेता खैरुल इस्लाम पर हमले और झड़पों की खबरें सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने भांगड़ को एक बार फिर हिंसा का केंद्र बना दिया है। चुनाव नजदीक आते ही TMC और ISF के बीच टकराव खुलकर सामने आ रहा है। आम लोग डर के माहौल में जी रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वोटिंग से पहले इलाके में शांति कैसे कायम होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भांगड़ जैसे संवेदनशील इलाकों में बढ़ती हिंसा आने वाले चुनावों को प्रभावित कर सकती है। एक तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस है, तो दूसरी तरफ ISF जैसे क्षेत्रीय दल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है, लेकिन इतना साफ है कि बंगाल चुनाव से पहले भांगड़ बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है।