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SIR Row in Bengal: 'बंगाल सरकार को अपनी निष्क्रियता के कारण बताने होंगे'; एसआईआर अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

SIR Row in Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा में तीन महिला अधिकारी समेत सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घटे तक बंधक बनाए जाने तक ममता सरकार और प्रशासन को जमकर फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं किया गया। फिर गृह सचिव और DGP से संपर्क किया गया। लेकिन कई घंटों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Apr 02, 2026 पर 12:29 PM
SIR Row in Bengal: 'बंगाल सरकार को अपनी निष्क्रियता के कारण बताने होंगे'; एसआईआर अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
SIR Row in Bengal: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना निंदनीय है

SIR Row in Bengal: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने इस घटना को पहले से प्लान की गई, सोची-समझी और मकसद वाली कोशिश बताया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हुए उन विरोध प्रदर्शनों का गंभीर संज्ञान लिया है जिनमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने चुनाव आयोग (ECI) को इस घटना की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराए जाने का अनुरोध करने की अनुमति दी।

'बंगाल में कानून-व्यवस्था ध्वस्त'

CJI ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था तंत्र ध्वस्त हो गया है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ने कहा कि मालदा जिले में तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने बंधक बना लिया था। उन्होंने कहा कि बुधवार देर रात तक उन्हें खुद स्थिति पर नजर रखनी पड़ी।

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