Bharat Taxi launch: भारत के टैक्सी बाजार में 5 फरवरी को यानी आज एक बड़ा बदलाव आने वाला है। दरअसल, सरकार समर्थित सहकारी स्वामित्व मॉडल पर आधारित कैब एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म 'भारत टैक्सी' आधिकारिक तौर पर लॉन्च करेगी। यह प्लेटफॉर्म ड्राइवरों के लिए शून्य कमीशन और यात्रियों के लिए कम किराए का वादा करता है।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह नई दिल्ली में इस ऐप को लॉन्च करेंगे। शाह ने X पर एक पोस्ट में भारत टैक्सी को सहकारी क्षेत्र में देश की पहली टैक्सी सेवा बताया और इसे निजी एग्रीगेटरों के विकल्प के रूप में पेश किया, जिसका संचालन ड्राइवरों द्वारा ही किया जाएगा।
एक भीड़ भरे बाजार में सहकारी मॉडल
हालांकि, इस पहल को सरकार का समर्थन प्राप्त है, लेकिन इसका संचालन सीधे केंद्र सरकार द्वारा नहीं किया जाता है। इस प्लेटफॉर्म का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो एक सहकारी संस्था है जिसे उन प्रोफेशनल्स द्वारा स्थापित किया गया है, जिन्होंने पहले भारत के सबसे प्रमुख सहकारी ब्रांड अमूल (Amul) के साथ काम किया है।
भारत टैक्सी कैसे काम करती है
सहकारी संरचना के तहत, प्रत्येक ड्राइवर, जिसे 'सारथी' कहा जाता है, सहकारी समिति में पांच शेयर रखता है। Ola या Uber के विपरीत, भारत टैक्सी प्रत्येक सवारी पर प्रतिशत-आधारित कमीशन नहीं काटेगी।
इसके बजाय, ड्राइवर ऐप का उपयोग करने के लिए रोजाना 30 रुपये का फिक्स्ड एक्सेस शुल्क देते हैं। प्रति-राइड कमीशन न होने से ड्राइवरों की कमाई बढ़ती है और उन्हें प्लेटफॉर्म की सफलता में सीधे हिस्सेदार होने का मौका मिलता है।
यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है
इंडस्ट्री एक्सपर्ट का अनुमान है कि यात्रियों के लिए किराया निजी एग्रीगेटरों द्वारा दिए जाने वाले किराए से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। शून्य कमीशन मॉडल से बचत सीधे यात्रियों तक पहुंचती है, जिससे शहरी कैब बाजारों में मूल्य प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ सकती है।
भारत के कैब इकोसिस्टम के लिए महत्व
यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब कमीशन, इंसेटिव और कामकाज की परिस्थितियों को लेकर ड्राइवरों और निजी प्लेटफॉर्मों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। अगर भारत टैक्सी बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह मौजूदा खिलाड़ियों को अपने किराया और कमीशन स्ट्रक्चर पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सहकारी मॉडल स्थापित एग्रीगेटरों के बड़े निवेश, तकनीक और नेटवर्क के प्रभाव से मुकाबला कर पाएगा। फिलहाल, भारत टैक्सी की शुरुआत भारत में राइड-हेलिंग अर्थव्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने का एक अनोखा प्रयास है-जिसमें ड्राइवरों को ठेकेदार से मालिक बनाया जा रहा है।