'डॉग बाबू' के बाद अब बिहार में 'कौआ' को मिला निवास प्रमाण पत्र, पिता का नाम 'कौआ सिंह'

बिहार में हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) लेकर अभियान चलाया गया। इसे लेकर लोग अपने दस्तावेज दुरुस्त करने-कराने में जुटे हैं। ऐसे में अजब गजब कागजात भी सामने आ रहे हैं। पहले डॉग बाबू के नाम से ऑनलाइन निवास प्रमाणपत्र बनने का मामला प्रकाश में आया था। वहीं अब एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।

अपडेटेड Aug 04, 2025 पर 11:20 PM
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फर्जी निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं (Photo: Canva)

बिहार में हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) लेकर अभियान चलाया गया। इसे लेकर लोग अपने दस्तावेज दुरुस्त करने-कराने में जुटे हैं। ऐसे में अजब गजब कागजात भी सामने आ रहे हैं. पहले डॉग बाबू के नाम से ऑनलाइन निवास प्रमाणपत्र बनने का मामला प्रकाश में आया था। अब खगड़िया जिले के दो अलग -अलग अंचल कार्यालयों में कौवा और भगवान राम व माता सीता के नाम से निवास प्रमाणपत्र बनाने का ऑनलाइन आवेदन आया है। इन आवेदनों के फोटो वाले जगहों पर बकायदा कौआ, भगवान राम और माता सीता की तस्वीर भी लगी है।

पिता का नाम कौआ सिंह

इस अजीब आवेदन में नाम "कौवा", पिता का नाम "कौआ सिंह", माता का नाम "मैना सिंह" और पता गांव भदास, ज़िला खगड़िया दर्ज किया गया था। जिला प्रशासन ने बताया कि आरटीपीएस पोर्टल के ज़रिए किए गए ऐसे कई फर्जी आवेदनों को खारिज कर दिया गया है। साथ ही, चौथम, गोगरी और चित्रगुप्तनगर जैसे थाना क्षेत्रों में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


तस्वीरें हो रही हैं वायरल 

फर्जी निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े मामलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही को लेकर लोगों में काफी नाराजगी और बहस छिड़ गई है। पिछले हफ्ते एक और अजीब मामला पूर्वी चंपारण ज़िले में सामने आया था, जहां एक आवेदन 'सोनालिका ट्रैक्टर' नाम से दाखिल किया गया। इसमें भोजपुरी अभिनेत्री मोनालिसा की फोटो लगाई गई थी। इतना ही नहीं, आवेदक ने खुद को 'स्वराज ट्रैक्टर' और 'कार देवी' का वंशज बताया था।

इससे पहले बिहार में 'डॉग बाबू' नाम से एक निवास प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया था। यह प्रमाण पत्र 'डॉग बाबू', पिता - 'डॉग बाबू' और माता - 'कुतिया देवी' के नाम से बना था। जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, प्रशासन को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और प्रमाण पत्र को तुरंत रद्द कर दिया गया। इस लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार कंप्यूटर ऑपरेटर को नौकरी से निकाल दिया गया और जिस राजस्व अधिकारी ने यह प्रमाण पत्र जारी किया था, उसके निलंबन की सिफारिश की गई। साथ ही, फर्जीवाड़े को लेकर एफआईआर भी दर्ज कराई गई।

यह घटना उन लोगों के लिए मुद्दा बन गई जो बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का विरोध कर रहे हैं। दरअसल, इस प्रक्रिया में निवास प्रमाण पत्र को मान्य माना गया, लेकिन आधार और राशन कार्ड को नहीं – जिससे सवाल उठने लगे कि इतनी लापरवाह प्रणाली में केवल निवास प्रमाण पत्र ही क्यों स्वीकार किया जा रहा है।

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