सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेताओं को सरकारी आवासों से इतना लगाव हो जाता है कि वे अपने परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए भी अलग-अलग सरकारी घरों की मांग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहने वाले लोगों को सरकारी सुविधाओं को अपना अधिकार नहीं समझना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, "जिस दिन मेरी पार्टी और मेरे नेता कह देंगे कि अब मेरी जरूरत नहीं है, मैं 24 घंटे के भीतर सरकारी बंगला खाली कर दूंगा और अपने निजी घर में रहने चला जाऊंगा।" उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पद और उससे जुड़ी सुविधाएं स्थायी नहीं होतीं। इसलिए पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास खाली करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।