बिहार की राजनीति 20 साल बाद एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बीते 20 साल बिहार की राजनीति की धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद से विदाई लेने की तैयारी में हैं। बता दें कि, जेडीयू के प्रमुख नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 20 साल का लंबा कार्यकाल अब खत्म होने की ओर है। जानकारी के मुताबिक, जेडीयू मुखिया शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए नई दिल्ली रवाना हो गए हैं। उनके साथ संजय झा और विजय कुमार चौधरी भी हैं, जो राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे।
इस दिन इस्तीफा देंगे नीतीश कुमार!
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अप्रैल को नीतीश कुमार अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसी दिन NDA के विधायकों की बैठक होने की संभावना है, जिसमें नए मुख्यमंत्री का चयन किया जाएगा। फिलहाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनने का सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बीजेपी के केंद्रीय नेताओं से मिलने के लिए नई दिल्ली जा रहे हैं।
जीता था राज्यसभा का चुनाव
नीतीश कुमार ने 30 मार्च को नई दिल्ली जाने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। 10 बार बिहार के मुख्यनंत्री रह चुके नीतीश कुमार ने 17 मार्च को चार अन्य NDA उम्मीदवारों के साथ राज्यसभा चुनाव जीता था। उन्होंने 5 मार्च को ही राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया था। इससे पहले उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते हैं, ताकि उनकी पुरानी इच्छा पूरी हो सके—जिसमें वह बिहार विधानसभा और विधान परिषद, साथ ही संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनना चाहते हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही महीने पहले नीतीश कुमार ने बिहार में NDA को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी। इस जीत ने एक बार फिर दिखा दिया कि राज्य की राजनीति में उनकी पकड़ अब भी मजबूत है, जिसे उन्होंने दो दशकों से ज्यादा समय में तैयार किया है।
इस बीच, उनके पूर्व सहयोगी और अब प्रतिद्वंद्वी बने तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को उनकी ही सहयोगी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा जाने के लिए मजबूर किया है।बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि बीजेपी जेडीयू को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है। वहीं, कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो उनकी भूमिका सिर्फ नाम तक सीमित रह सकती है और उनकी पार्टी का असर भी पहले जैसा मजबूत नहीं रहेगा।