पश्चिम बंगाल में एक बूथ लेवल ऑफिसर की मौत ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। पुलिस के अनुसार, रविवार को पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा ज़िले में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मृत पाए गए। इस घटना के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि चुनावी सूचियों के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े भारी काम के दबाव के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। मृतक की पहचान हरधन मंडल के रूप में हुई है। उनका शव रविवार सुबह रानीबांध ब्लॉक के एक स्कूल परिसर से बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से एक नोट भी मिला है, जिसे सुसाइड नोट माना जा रहा है। मामले की जांच की जा रही है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हरधन मंडल पेशे से स्कूल शिक्षक थे और रानीबांध ब्लॉक के राजकाटा इलाके में बूथ नंबर 206 के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में काम कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, मौके से मिले नोट पर मंडल के हस्ताक्षर थे। उस नोट में उन्होंने BLO के तौर पर काम के दबाव को सहन न कर पाने की बात लिखी थी। अधिकारी ने कहा, “नोट को जब्त कर लिया गया है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।” पुलिस ने मंडल की मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जल्दबाजी और दबाव वाली चुनावी प्रक्रिया अपनाने का आरोप लगाया है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को जबरन आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चुनाव आयोग के तहत काम कर रहे एक और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने इस जल्दबाजी, अव्यवस्थित और राजनीतिक रूप से प्रेरित SIR प्रक्रिया के अमानवीय दबाव में अपनी जान गंवा दी है। बनर्जी ने यह भी दावा किया कि हरधन मंडल के सुसाइड नोट में उनके इस कदम के लिए काम के अत्यधिक और अमानवीय दबाव को जिम्मेदार बताया गया है।
उन्होंने कहा कि जो काम एक व्यवस्थित और शांत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था, उसे एक कमजोर और दबाव में काम करने वाले चुनाव आयोग ने जबरन आगे बढ़ा दिया है। उनका आरोप था कि यह सब एक पार्टी के राजनीतिक फायदे और एक व्यक्ति के अहंकार को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी ने आगे दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया से कर्मचारियों में घबराहट, चिंता और भारी थकान पैदा हुई है, जिसकी वजह से 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के लिए अगर लोग थकान, तनाव या डर की वजह से मर भी जाते हैं, तो यह उनके सत्ता के खेल में एक स्वीकार्य नुकसान माना जाता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल न तो इस सबको माफ करेगा और न ही भूलेगा, और इतिहास सब कुछ देख रहा है। गौरतलब है कि राज्य में चुनावी सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 4 नवंबर से शुरू हुआ था।