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BMC Elections 2026: BMC चुनाव में महिला वोट कितना अहम? क्या चाहती है मुंबई की आधी आबादी...सामने आया ये सर्वे

BMC Elections 2026: महिला वोटर जहां पारंपरिक राजनीतिक सोच से सबसे अलग दिखती हैं, वह है सुरक्षा और रोजमर्रा की शहरी सुविधाओं को लेकर उनका नजरिया। इन मुद्दों पर उनकी प्राथमिकताएं बाकी समूहों से साफ तौर पर अलग नजर आती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 26, 2025 पर 3:45 PM
BMC Elections 2026: BMC चुनाव में महिला वोट कितना अहम? क्या चाहती है मुंबई की आधी आबादी...सामने आया ये सर्वे
BMC Elections 2026: BMC चुनाव 2026 में सोई हुई ताकत, मुंबई की महिला वोटर क्या चाहती हैं?

BMC Elections 2026: जैसे-जैसे Mumbai साल 2026 में होने वाले लंबे समय से टले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों की ओर बढ़ रहा है, राजनीति का फोकस फिलहाल गठबंधनों के समीकरण, पार्टियों में टूट-फूट और नेतृत्व की खींचतान पर बना हुआ है। लेकिन इसी बीच सामने आए नए वोटर डेटा से पता चलता है कि शहर के सबसे अहम वोटर समूहों में से एक, यानी महिलाएं, अब भी चुनावी चर्चा में पीछे हैं और उनकी समस्याओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।

Ascendia Strategies की ओर से 1,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए शहरव्यापी सर्वे ‘BMC इलेक्शन: मुंबई में ट्रिपल-M प्ले’ के मुताबिक, महिलाओं को अपने इलाके के स्थानीय कॉर्पोरेटर के बारे में सबसे कम जानकारी है। सर्वे में शामिल केवल 44 फीसदी महिलाओं को अपने कॉर्पोरेटर का नाम पता था, जबकि मराठी मानुष वोटरों में यह आंकड़ा 68 फीसदी और मुस्लिम वोटरों में 60 फीसदी रहा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि जानकारी की यह कमी महिलाओं की राजनीति में रुचि न होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि उन्हें अब तक सही तरह से जोड़ा नहीं गया है।

स्वतंत्र वोटर, लेकिन भागीदारी कम

सर्वे के मुताबिक 65 फीसदी महिलाएं अपना वोट खुद तय करती हैं। सिर्फ 11 फीसदी महिलाओं ने माना कि उनके फैसले पर पति या पिता का असर होता है। पड़ोसियों, सामाजिक संगठनों या मीडिया का प्रभाव लगभग न के बराबर है। नगर निगम जैसे चुनाव, जिन्हें अक्सर परिवार या समुदाय के वोटिंग पैटर्न से जुड़ा माना जाता है, वहां महिलाओं की यह स्वतंत्रता चौंकाने वाली है। इसके बावजूद, स्थानीय नेताओं से उनका जुड़ाव कमजोर दिखता है। सर्वे में 57 फीसदी महिलाओं ने कहा कि उन्होंने कभी अपने इलाके के कॉर्पोरेटर से संपर्क नहीं किया। वहीं, सिर्फ 23 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके द्वारा उठाई गई समस्या का समाधान हो पाया। इससे साफ है कि वोट देने में महिलाएं आत्मनिर्भर हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी भागीदारी अब भी सीमित है।

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