समय और दस्तावेज- दोनों की एक खासियत होती है: ये कभी भूले नहीं जाते। 36 साल पहले उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला प्रदीप सक्सेना अपने भाई की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बच निकला। उसने अपना धर्म, नाम और पहचान बदल ली, पर कानून से आखिरकार बच नहीं पाए।
