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भाई का हत्यारा प्रदीप सक्सेना बना अब्दुल रहीम, 36 साल बाद ऐसे पकड़ा गया

1987 में अपने भाई की हत्या के केस में प्रदीप सक्सेना आरोपी बनाया गया और 1989 में दोषी साबित हुआ। पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया और पुलिस की नजरों से ओझल हो गया। वह बरेली से लगभग 100 किलोमीटर दूर मुरादाबाद पहुंच गया और ‘अब्दुल रहीम’ नाम से नई पहचान बना ली। उसने दाढ़ी रखी और ड्राइवर का काम शुरू कर दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 28, 2025 पर 8:52 PM
भाई का हत्यारा प्रदीप सक्सेना बना अब्दुल रहीम, 36 साल बाद ऐसे पकड़ा गया
भाई का हत्यारा प्रदीप सक्सेना बना अब्दुल रहीम, 36 साल बाद ऐसे पकड़ा गया

समय और दस्तावेज- दोनों की एक खासियत होती है: ये कभी भूले नहीं जाते। 36 साल पहले उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला प्रदीप सक्सेना अपने भाई की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बच निकला। उसने अपना धर्म, नाम और पहचान बदल ली, पर कानून से आखिरकार बच नहीं पाए।

1987 में अपने भाई की हत्या के केस में प्रदीप सक्सेना आरोपी बनाया गया और 1989 में दोषी साबित हुआ। पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया और पुलिस की नजरों से ओझल हो गया।

वह बरेली से लगभग 100 किलोमीटर दूर मुरादाबाद पहुंच गया और ‘अब्दुल रहीम’ नाम से नई पहचान बना ली। उसने दाढ़ी रखी और ड्राइवर का काम शुरू कर दिया। समय बीतता गया, और उसे लगा कि उसका अतीत और सजा दोनों पीछे छूट चुके हैं।

लेकिन कानून ने उसे नहीं भूला था। 16 अक्टूबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को चार हफ्तों में सक्सेना को पेश करने का आदेश दिया गया। पुलिस ने पुरानी फाइल खोलीं और एक टीम बनाई गई।

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