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BSNL डायरेक्टर के 'शाही शौक', संगम स्नान के लिए तैनात थे 50 अफसर...अब हुआ ये एक्शन

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि BSNL के निदेशक विवेक बंसल के प्रस्तावित दौरे के लिए जो इंतजाम किए गए, वे तय नियमों और परंपराओं के खिलाफ थे। उन्होंने इस घटना को “गलत”, “हैरान करने वाला” और अस्वीकार्य करार दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 25, 2026 पर 3:42 PM
BSNL डायरेक्टर के 'शाही शौक', संगम स्नान के लिए तैनात थे 50 अफसर...अब हुआ ये एक्शन
प्रयागराज दौरे के लिए जारी 'वीआईपी प्रोटोकॉल' को लेकर बवाल मचा हुआ है।

बीएसएनएल (BSNL) के डायरेक्टर विवेक बंसल के प्रयागराज दौरे के लिए जारी 'वीआईपी प्रोटोकॉल' को लेकर बवाल मचा हुआ है। 19 फरवरी को डीजीएम स्तर से जारी इस योजना में उनके संगम स्नान, तौलिया, कपड़ों और भोजन जैसी व्यक्तिगत व्यवस्थाओं के लिए 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारयों की तैनाती की गई थी। वहीं अब केंद्र सरकार ने इस मामले में एक्शन लिया है। केंद्र सरकार ने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी सूत्रों ने इस पूरे मामले को “पूरी तरह अजीब और अस्वीकार्य” बताया है। वहीं इस शाही प्रोटोकॉल जारी करने वाले अधिकारी डीजीएम बृजेंद्र कुमार सिंह का तबादला कर दिया गया। उन्हें प्रयागराज से 1000 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम भेजा गया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कही ये बात

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि, BSNL के निदेशक विवेक बंसल के प्रस्तावित दौरे के लिए जो इंतजाम किए गए, वे तय नियमों और परंपराओं के खिलाफ थे। उन्होंने इस घटना को “गलत”, “हैरान करने वाला” और अस्वीकार्य करार दिया। प्रयागराज दौरे के लिए किए गए बड़े इंतज़ामों से जुड़े एक आंतरिक कार्यालय आदेश के सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “मैंने साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह गलत है और तय नियमों व परंपराओं का उल्लंघन है। यह स्वीकार्य नहीं है और हैरान करने वाला है।”

उन्होंने बताया कि संबंधित निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। जवाब मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। विवाद तब बढ़ा जब विवेक बंसल के प्रयागराज दौरे की विस्तृत तैयारियों से जुड़ा कार्यालय आदेश ऑनलाइन सामने आया। इसकी आलोचना इस आधार पर हुई कि सरकारी कर्मचारियों और संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे कार्यक्रम के लिए किया गया, जो काफी हद तक निजी या धार्मिक यात्रा जैसा लग रहा था।

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