Budget 2026: रिश्तों में तनाव के बीच भारत ने बांग्लादेश की फंडिंग की आधी, बजट में हुआ ये ऐलान

Budget 2026: बजट के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश के लिए विदेशी सहायता का आवंटन 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया है। यह कटौती सभी पड़ोसी देशों में सबसे ज़्यादा है। हालांकि, भारत ने अपने ज़्यादातर अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद को या तो पहले जैसा बनाए रखा है या उसमें बढ़ोतरी की है

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 8:08 PM
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बांग्‍लादेश पर गिरी गाज, भारत ने मदद की रकम कर दी आधी, क‍िसकी भरी झोली?

भारत ने यूनियन बजट 2026-27 में अपनी विदेशी विकास सहायता नीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत सरकार ने आज पेश किए गए अपने बजट में बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद में बड़ी कटौती की है। इस साल बांग्लादेश के लिए सिर्फ 60 करोड़ रुपए रखे गए हैं, जबकि पिछले साल 120 करोड़ रुपए दिए गए थे। यानी भारत ने बांग्लादेश की मदद आधी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ घटनाओं और हत्याओं की खबरें सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के चलते दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

बजट के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश के लिए विदेशी सहायता का आवंटन 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया है। यह कटौती सभी पड़ोसी देशों में सबसे ज़्यादा है। हालांकि, भारत ने अपने ज़्यादातर अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद को या तो पहले जैसा बनाए रखा है या उसमें बढ़ोतरी की है।

भूटान-नेपाल को मिलेगी मदद


भारत ने बांग्लादेश के लिए 120 करोड़ रुपये की सहायता तय की थी, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव होने की वजह से इसमें से सिर्फ 34.48 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। वहीं, भूटान अब भी भारत से सबसे ज़्यादा सहायता पाने वाला देश बना हुआ है। इसके बाद नेपाल, मालदीव और श्रीलंका का नंबर आता है। बजट में “देशों को सहायता” के तहत कुल राशि बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह पिछले साल के बजट अनुमान 5,483 करोड़ रुपये से करीब 4 प्रतिशत ज़्यादा है।

भूटान की बढ़ी मदद

भूटान भारतीय मदद का सबसे बड़ा पाने वाला देश बना हुआ है, जिसका एलोकेशन लगभग 6 फीसदी बढ़कर 2,289 रुपए करोड़ कर दिया है, जो हाइड्रोपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लगातार सपोर्ट दिखाता है। नेपाल का एलोकेशन लगभग 14% बढ़कर Rs. 800 करोड़ हो गया है, जबकि श्रीलंका की मदद लगभग एक-तिहाई बढ़कर 400 रुपए करोड़ हो गई है, जो इस द्वीपीय देश की संकट के बाद रिकवरी में भारत की भूमिका को दिखाता है।

 

चाबहार पोर्ट के लिए नहीं है हुआ कोई ऐलान

इस बजट में एक बड़ा बदलाव यह भी है कि चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई फंड नहीं रखा गया है। जबकि 2024-25 में भारत ने इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 2025-26 के शुरुआती बजट अनुमान में इसके लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिसे बाद में संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। भारत ने 2024 में चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को चलाने के लिए 10 साल का समझौता किया था। चाबहार परियोजना को भारत के लिए काफी अहम माना जाता है, क्योंकि इसके ज़रिये भारत, पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुँच बना सकता है। इस परियोजना की फंडिंग रुकने की एक बड़ी वजह ईरान को लेकर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव भी माना जा रहा है। खास तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है।

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