
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत (Nitin Gadkari Interview) में उनके विभाग द्वारा किए गए विकास कार्यों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने अमेरिकी टैरिफ से लेकर सरकार की उपलब्धियों तक हर एक मुद्दे पर अपनी राय रखी।
इस सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा कि , पहली बात तो ये है कि हमारे देश में सड़कें भी अलग-अलग तरह के हैं और उसकी एजेंसी भी अलग-अलग है। मैं केवल नेशनल हाईवे, राष्ट्रीय महामार्ग का मंत्री हूं। हमारे देश में 63 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। उसमें से 1.5 लाख किलोमीटर की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर है। गांव की सड़क है, जिला की सड़क है, राज्य की सड़क है, एडीडीए [ph] की सड़क है, निगम की सड़क है, फिर राज्य सरकार की सड़क है। तो बहुमत जो राष्ट्रीय राजमार्ग है, उसकी मेरी जिम्मेदारी है। एक बात जरूरी है कि हमारे यहां ये जो सड़कें हैं, इसमें हमारे यहां अनेक जगह काली कपास मिट्टी है। और डम्बर और इसका, पानी की दुश्मनी है। पानी क्या हुआ जैसा मैं नागपुर से हूं, पूरी कंक्रीट रोड बनाई मैंने। अभी मुंबई पुणे हाईवे, आज 30 साल हो गए, उसमें कोई ये नहीं है। और ये क्या हुआ कि अनेक जगह पर अभी हमने व्हाइटटॉपिंग करके एक नई तकनीक बनाई है, जो डंबर रोड को निकाल कर उसके ऊपर 6 या 8 इंच का हमलोग बिटुमेन का अपना -- व्हाइटटॉपिंग कंक्रीट करते हैं। तो स्वाभाविक रूप से प्रौद्योगिकी में भी सुधार करना होगा। और दूसरी बात, कभी-कभी इतने बड़े प्रमाण पर बारिश होती है, बादल फटते हैं, तो समस्या होती है। अभी हमने एक नया कार्यक्रम शुरू किया है कि ब्लैकस्पॉट की भी पहचान कर रहे हैं, 40,000 करोड़ उसका ऊपर खर्च कर रहे हैं, जो दुर्घटनाएं होती हैं। जलभराव वाले स्थान की भी पहचान करें। और जलभराव के साथ अभी हमलोग -- और हमने तय किया है कि जलभराव के साथ हमलोग जो भूस्खलन होते हैं, वो भी हमलोग स्पॉट की पहचान करेंगे। और ये सब जगह पर हमलोग ने ये तय किया है कि हमलोग -- पानी भी जाए ताकि -- पानी के [inaudible] लॉगिंग होता है तो रोड ख़राब होता है। तो इसके लिए आधार पर काम करने की कोशिश हम कर रहे हैं।
जवाब - अभी तो ऐसा है कि पूरा विषय हमारा विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय इसकी तरफ देख रही है। जहां तक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री है, उसमें हमारा एक्सपोर्ट अमेरिका के साथ-साथ बाकी देशो में बड़े प्रमाण पर है और लगातार ग्रोथ हो रही है। अभी भी रिपोर्ट वही है. तो मुझे लगता है हमारी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आगे जाएगी। और अभी एक समय जब मैं मंत्री बना, तो हमारा नंबर सातवा था दुनिया में। अब हम तीसरे नंबर पर आये हैं। अभी हमने जापान को पीछे डाल कर हम तीसरे नंबर पर आये हैं और जापान चौथे नंबर पर आ गये। और अमेरिका का साइज है ७८ लाख करोड़, चीन का है 49 लाख करोड़, हमारा है २२ लाख करोड़. और मुझे विश्वास है कि जिस प्रकार से वैकल्पिक ईंधन, बायोफ्यूल में हम काम कर रहे हैं, हमारे यहां स्क्रैपिंग पॉलिसी आई है, इलेक्ट्रिक, इथेनॉल, मेथनॉल, बायोडीजल, एलएनजी, सीएनजी, हाइड्रोजन, सब मुझे जो हम जिस प्रकार से काम कर रहे हैं, तो मुझे विश्वास है कि हम ५ साल में दुनिया में पहली क्रामंक को हासिल करने की कोशिश करेंगे।
जवाब - मैं अमेरिका के बारे में तो कोई टिप्पणी नहीं करूंगा पर मैं आपको इतना ही कहूंगा कि हमारी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री लगातार ग्रोथ कर रही है और ग्रोथ ही आगे बढ़ती जा रही है।
जवाब - नहीं ऐसा हमारी इकोनॉमी में जो आना चाहता है, वो आ सकता है। और हमारे यहां अभी जो इलेक्ट्रिक ब्रांड हैं अभी, जैसे इसमें टाटा ने, महिंद्रा ने, अभी सभी ब्रांड आए हैं, और बहुत अच्छे मॉडल आए हैं, मॉडल में डिजाइन, गुणवत्ता, और लागत, इसका उपभोक्ता बाजार खराब है। अभी हमने भारत एनसीएएपी भी लगा दिया, स्टार रेटिंग। उसका कारण भी गुणवत्ता अच्छी बन रही है, डिजाइन अच्छी बन रही है, और मुझे लगता है कि बाजार संचालित अर्थव्यवस्था होने के कारण, जिसकी गुणवत्ता, लागत और औसत और डिजाइनिंग अच्छा होगा, उसको अच्छा बाजार मिलेगा। फिल्हाल इंडिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, दुनिया के सब ब्रांड यहां उपस्थित हैं। अभी ट्रैक्टर में, बस में, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट में, सब में ग्रोथ है, २०%, २२%, २४% ग्रोथ है। मुझे लगता है आने वाले समय में सभी उद्योगों का भविष्य बहुत अच्छा है।
नितिन गडकरी ने कहा कि, मैं अमेरिका के बारे में तो कोई टिप्पणी नहीं करूंगा पर मैं आपको इतना ही कहूंगा कि हमारी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री लगातार ग्रोथ कर रही है और ग्रोथ ही आगे बढ़ती जा रही है।
इस सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा कि, नहीं ऐसा हमारी इकोनॉमी में जो आना चाहता है, वो आ सकता है। और हमारे यहां अभी जो इलेक्ट्रिक ब्रांड हैं अभी, जैसे इसमें टाटा ने, महिंद्रा ने, अभी सभी ब्रांड आए हैं, और बहुत अच्छे मॉडल आए हैं, मॉडल में डिजाइन, गुणवत्ता, और लागत, इसका उपभोक्ता बाजार खराब है। अभी हमने भारत एनसीएएपी भी लगा दिया, स्टार रेटिंग। उसका कारण भी गुणवत्ता अच्छी बन रही है, डिजाइन अच्छी बन रही है, और मुझे लगता है कि बाजार संचालित अर्थव्यवस्था होने के कारण, जिसकी गुणवत्ता, लागत और औसत और डिजाइनिंग अच्छा होगा, उसको अच्छा बाजार मिलेगा। फिल्हाल इंडिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, दुनिया के सब ब्रांड यहां उपस्थित हैं। अभी ट्रैक्टर में, बस में, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट में, सब में ग्रोथ है, २०%, २२%, २४% ग्रोथ है। मुझे लगता है आने वाले समय में सभी उद्योगों का भविष्य बहुत अच्छा है।
इस सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा कि, ये पूरी तरह गलत है। एआरएआई करके जो संस्था है, वहाँ पुरानी गाड़ियों पर भी ट्रायल हुई—एक-एक लाख किलोमीटर तक। बाद में अभी ब्राज़ील में हमारी जो ब्रांच है, यहाँ जो ब्राज़ील में है, वहाँ २७% एथनॉल डालते हैं। कोई कंप्लेंट नहीं है। और अभी मेरे पास इनोवा गाड़ी है जो १००% एथनॉल पे चलती है, ६०% बिजली तैयार करती है। एक साल से मेरे पास है, एक भी कंप्लेंट नहीं है। ये पहली बात तो एथनॉल एक बहुत अच्छा ग्रीन फ्यूल है। और हमारे यहाँ प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। यह २२ लाख करोड़ का फॉसिल फ्यूल है जिसके कारण हमारे देश में प्रदूषण होता है। और प्रदूषण भी कम होगा इसके कारण, इम्पोर्ट २२ लाख करोड़ का वो कुछ कम होगा और एथनॉल का फायदा किसानों को होगा। और यहाँ किसानों को आज देखो—अभी हमने मक्का से एथनॉल बनाने को अनुमति दी तो मक्का का भाव १२०० क्विंटल था और एमएसपी १८०० क्विंटल थी। अब मक्का का भाव २८०० क्विंटल हो गया। और अब पूरा यूपी, बिहार, सब देश में तीन गुना मक्का का प्लांटेशन बढ़ा है। तो इसका मतलब किसानों को वो तीन क्रॉप मक्का के ले सकते हैं। तो ये किसान रूरल एग्रीकल्चर इकॉनॉमी को बूस्ट करने वाली बात है और इसमें किसानों का फायदा है, देश का इम्पोर्ट कम हो रहा है। वो हमारी पॉलिसी है—इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूट, कॉस्ट इफेक्टिव, पॉल्यूशन फ्री और इंडिजिनस। क्या इस देश का इम्पोर्ट कम नहीं होना चाहिए जो २२ लाख करोड़ का है? क्या इसके कारण फॉसिल फ्यूल के कारण दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण हो रहा है और जिसका हमारे लोगों पर जो परिणाम है, क्या लोगों का स्वास्थ्य नहीं सुधरना चाहिए? क्या इस देश के किसान आज जहाँ गरीबी, भुखमरी का सामना कर रहे हैं, उनका इनकम डबल करने में ये बायो फ्यूल की भूमिका महत्वपूर्ण नहीं है? क्या वो किसान समृद्ध, संपूर्ण नहीं होना चाहिए? जो पेट्रोलियम लॉबी में से कुछ लोग हैं, जो इस बारे में आप प्रचार कर रहे हैं—हर चीज़ हमने टेक्निकल ग्राउंड पर वेरिफ़ाई करके की है और उसी के आधार पर निर्णय किया है।
बता दें कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मनीकंट्रोल की एडिटर श्वेता पुंज से खास बातचीत की।
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