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Exclusive: पेट्रोल-इथेनॉल विवाद से लेकर अमेरिकी टैरिफ तक...नितिन गडकरी ने दिया हर सवाल का जवाब

Nitin Gadkari Interview : मनीकंट्रोल से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, पहली बात तो ये है कि हमारे देश में सड़कें भी अलग-अलग तरह के हैं और उसकी एजेंसी भी अलग-अलग है। मैं केवल नेशनल हाईवे, राष्ट्रीय महामार्ग का मंत्री हूं। हमारे देश में 63 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। उसमें से 1.5 लाख किलोमीटर की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 23, 2025 पर 9:42 PM
Exclusive: पेट्रोल-इथेनॉल विवाद से लेकर अमेरिकी टैरिफ तक...नितिन गडकरी ने दिया हर सवाल का जवाब
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत की।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत (Nitin Gadkari Interview) में उनके विभाग द्वारा किए गए विकास कार्यों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने अमेरिकी टैरिफ से लेकर सरकार की उपलब्धियों तक हर एक मुद्दे पर अपनी राय रखी।

  • सवाल - गडकरी जी, अभी हम एयरपोर्ट जा रहे हैं और हम दिल्ली में हैं। यह मानसून का समय है। मानसून के समय पर हर नागरिक की एक शिकायत रहती है कि सड़कें बड़ी टूटती है और बहुत जल्दी टूटती है। अभी मुंबई में भी हमने देखा कि पानी भरा हुआ था सड़कों पेनए फ्लाईओवर में पानी भर रहा था, टूट रही थी सड़कें ऐसे क्यों हो रहा है? आपने कहा है कि हम अमेरिका जैसे सड़कें बनाएंगे 2 साल में। ऐसा हो क्यों रहा है और हम कैसे इतनी अच्छी सड़कें बना पाएंगे जो कि इतनी उबड़-खाबड़ ना हो?
  • इस सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा कि , पहली बात तो ये है कि हमारे देश में सड़कें भी अलग-अलग तरह के हैं और उसकी एजेंसी भी अलग-अलग है। मैं केवल नेशनल हाईवे, राष्ट्रीय महामार्ग का मंत्री हूं। हमारे देश में 63 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। उसमें से 1.5 लाख किलोमीटर की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर है। गांव की सड़क है, जिला की सड़क है, राज्य की सड़क है, एडीडीए [ph] की सड़क है, निगम की सड़क है, फिर राज्य सरकार की सड़क है। तो बहुमत जो राष्ट्रीय राजमार्ग है, उसकी मेरी जिम्मेदारी है। एक बात जरूरी है कि हमारे यहां ये जो सड़कें हैं, इसमें हमारे यहां अनेक जगह काली कपास मिट्टी है। और डम्बर और इसका, पानी की दुश्मनी है। पानी क्या हुआ जैसा मैं नागपुर से हूं, पूरी कंक्रीट रोड बनाई मैंने। अभी मुंबई पुणे हाईवे, आज 30 साल हो गए, उसमें कोई ये नहीं है। और ये क्या हुआ कि अनेक जगह पर अभी हमने व्हाइटटॉपिंग करके एक नई तकनीक बनाई है, जो डंबर रोड को निकाल कर उसके ऊपर 6 या 8 इंच का हमलोग बिटुमेन का अपना -- व्हाइटटॉपिंग कंक्रीट करते हैं। तो स्वाभाविक रूप से प्रौद्योगिकी में भी सुधार करना होगा। और दूसरी बात, कभी-कभी इतने बड़े प्रमाण पर बारिश होती है, बादल फटते हैं, तो समस्या होती है। अभी हमने एक नया कार्यक्रम शुरू किया है कि ब्लैकस्पॉट की भी पहचान कर रहे हैं, 40,000 करोड़ उसका ऊपर खर्च कर रहे हैं, जो दुर्घटनाएं होती हैं। जलभराव वाले स्थान की भी पहचान करें। और जलभराव के साथ अभी हमलोग -- और हमने तय किया है कि जलभराव के साथ हमलोग जो भूस्खलन होते हैं, वो भी हमलोग स्पॉट की पहचान करेंगे। और ये सब जगह पर हमलोग ने ये तय किया है कि हमलोग -- पानी भी जाए ताकि -- पानी के [inaudible] लॉगिंग होता है तो रोड ख़राब होता है। तो इसके लिए आधार पर काम करने की कोशिश हम कर रहे हैं।

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