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Allahabad High Court: क्या दो अलग-अलग धर्मों के लोग लिव-इन में रह सकते हैं? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया साफ

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अदालत अलग-अलग धर्म के कपल को हिंदू और मुसलमान के रूप में नहीं, बल्कि दो बालिग व्यक्तियों के रूप में देखता है, जो साथ में खुशी से रह रहे हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले इंटरफेथ कपल की रक्षा करता है।

Translated By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Mar 30, 2026 पर 11:51 AM
Allahabad High Court: क्या दो अलग-अलग धर्मों के लोग लिव-इन में रह सकते हैं? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया साफ
क्या दो अलग-अलग धर्मों के लोग लिव-इन में रह सकते हैं? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया साफ

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अदालत अलग-अलग धर्म के कपल (Interfaith Couple) को हिंदू और मुसलमान के रूप में नहीं, बल्कि दो बालिग व्यक्तियों के रूप में देखता है, जो साथ में खुशी से रह रहे हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले इंटरफेथ कपल की रक्षा करता है।

जस्टिस विवेक कुमार सिंह की पीठ एक लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे इंटरफेथ कपल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कपल ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर है और पुलिस ने उनकी चिंताओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की।

कोर्ट ने 18 मार्च के अपने आदेश में कहा कि सरकार के वकील ने कहा है कि इंटरफेथ कपल के एक साथ रहने के संबंध में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।

अदालत कपल को हिंदू और मुसलमान के रूप में नहीं देखता

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