Rakesh Ranjan: होर्मूज स्ट्रेट में फंसे कैप्टन राकेश रंजन की मौत, परिजनों ने शव लाने के लिए सरकार से लगाई गुहार

Rakesh Ranjan: ईरान और इजरायल के जारी संघर्ष के बीच, रांची के रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन की होर्मूज स्ट्रेट में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। दरअसल, जिस वक्त उनकी मौत हुई उस समय जहाज होर्मूज स्ट्रेट से गुजर रहा था। वहीं, परिवार अब उनके शव को वापस देश लाने की मांग कर रहा है।

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 2:29 PM
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होर्मूज स्ट्रेट में फंसे कैप्टन राकेश रंजन की मौत

Rakesh Ranjan: ईरान और इजरायल के जारी संघर्ष के बीच, रांची के रहने वाले कैप्टन राकेश रंजन की होर्मूज स्ट्रेट में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। दरअसल, तेल टैंकर अवाना पर तैनात कैप्टन राकेश रंजन को 18 मार्च को जहाज पर ही हार्ट अटैक आ गया और समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से उनकी मौत हो गई। जिस वक्त उनकी मौत हुई उस समय जहाज होर्मूज स्ट्रेट से गुजर रहा था। वहीं, अधिकारियों ने बताया कि मिडिल ईस्ट में टेंशन की वजह से उन्हें एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। अब परिवार उनके शव को वापस देश लाने की मांग कर रहा है।

मृतक के परिवार के अनुसार, कैप्टन राकेश रंजन 2 फरवरी को रांची से दुबई के लिए रवाना हुए थे ताकि वे 'ASP Avana- RPSL-MUM-172' नामक जहाज में शामिल हो सकें। इसके बाद जहाज तेल लोड करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश किया और 1 मार्च को भारत के लिए रवाना होने वाला था। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण जहाज को अपना संचालन रोकना पड़ा।

कैप्टन राकेश के परिवार ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण क्षेत्रीय आवाजाही रोक दी गई थी, जिसके बाद से जहाज 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट से लगभग 14 नॉटिकल मील दूर फंसा हुआ था।


'मेरा छोटा भाई जहाज का कप्तान था'

मृतक के बड़े भाई उमेश सिंह ने PTI को बताया, “मेरा छोटा भाई जहाज का कप्तान था। 18 मार्च को कंपनी ने हमें सूचित किया कि बेहोश होने के बाद वह अपनी कुर्सी से गिर गया था और फिर उसे मेडिकल सहायता दी गई। हालांकि, उसे एयरलिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उसे नाव से दुबई के पोर्ट राशिद ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।”

रंजन का शव दुबई के शेख राशिद अस्पताल के शवगृह (Mortuary) में पोर्ट पुलिस की निगरानी में रखा गया है। कप्तान राकेश रंजन, जो बिहार शरीफ, नालंदा जिले के मूल निवासी थे, लगभग 20 सालों से रांची में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहे थे।

बड़े भाई ने दी जानकारी

मृतक के परिवार का मानना ​​है कि अगर समय पर मेडिकल हेल्प मिल जाती, तो रंजन की मौत नहीं होती। उमेश सिंह ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "जब शिपिंग कंपनी ने हमें बताया कि राकेश जी बेहोश हो गए हैं, तो परिवार में हड़कंप मच गया और फिर हमने हर जगह संपर्क करना शुरू कर दिया... हमने कंपनी के सिंगापुर हेड ऑफिस से संपर्क करके उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली।"

उन्होंने बताया कि लगभग 7-8 घंटे बाद परिवार को सुचित किया गया कि कैप्टन रंजन का निधन हो गया है। परिवार कथित तौर पर कैप्टन रंजन की मृत्यु के सटीक कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

'समय बर्बाद न होता, तो जान बच जाती'

बड़े भाई उमेश ने आगे कहा, "मौत का सटीक कारण अभी तक हमें पता नहीं चला है और कंपनी ने भी मौत के कारणों के बारे में लिखित में कुछ नहीं बताया है... अगर 5-6 घंटे बर्बाद न हुए होते, तो उनकी जान बच सकती थी।"

मृतक के परिवार ने केंद्र और झारखंड सरकार से कैप्टन रंजन का शव जल्द से जल्द वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

उमेश ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध करता हूं कि वे मेरे भाई का शव जल्द से जल्द वापस लाने में मदद करें। कंपनी को भी उनके बकाया और हकों के भुगतान में कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए और सरकार को इस मामले की निगरानी करनी चाहिए। इसके अलावा, मैं केंद्र सरकार, दुबई स्थित भारतीय दूतावास और कंपनी से अपील करता हूं कि वे मेरे भाई का शव जल्द से जल्द हमें सौंप दें।”

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