सरकार ने शुक्रवार को एयर प्यूरीफायरों पर टैक्स में छूट देने का विरोध किया। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि राजधानी की हवा काफी जहरीली हो गई है, ऐसे में सरकार साफ हवा नहीं दे सकती, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर लगने वाले 18% GST को ही कम कर दे। सरकार की ओर से पेश होते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने जस्टिस विकास महाजन और जस्टिस विनोद कुमार को याचिका का जवाब देने के लिए दिए गए 48 घंटे के समय के बारे में बताया।
हालांकि, सरकार ने तर्क दिया कि एयर प्यूरीफायर पर GST को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की याचिका, ताकि वे गरीब परिवारों के लिए ज्यादा किफायती हो सकें, निराधार है, क्योंकि GST रेट जीएसटी परिषद सभी हितधारकों के विचार-विमर्श के बाद तय करता और इसे रिट याचिका के जरिए 'रद्द' नहीं किया जा सकता है।
तो खुल जाएगा मुसीबतों का पिटारा!
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि GST काउंसिल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि एयर प्यूरीफायर 'मेडिकल डिवाइस' हैं या नहीं। सरकार ने कहा कि यह निर्णय केवल स्वास्थ्य मंत्रालय ही ले सकता है, जिसे इस मामले में शामिल नहीं किया गया है।
याचिका में ऐसी मांग की गई थी कि एयर प्यूरीफायर को 'मेडिकल डिवाइस' की कैटेगरी में रखा जाए, ताकि इस पर लगने वाला टैक्स कम हो जाए।
ASG वेंकटरमन ने कहा कि अगर एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम किया गया तो 'पेंडोरा बॉक्स' खुल जाएगा। बता दें कि “Pandora’s Box will be open” एक अंग्रेजी कहावत है, जिसका मतलब होता है- ऐसा कुछ शुरू होना, जिससे बहुत सारी परेशानियां, मुसीबतें या अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ जाएं।
हालांकि, ASG ने एक चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इससे पहले गुरुवार को अदालत ने सरकार को दो विकल्प दिए- 'ताजी हवा उपलब्ध कराएं या एयर प्यूरीफायर पर GST घटाएं'। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि 'हेल्थ इमरजेंसी' के बीच टैक्स में कमी करना सरकार का "न्यूनतम" कर्तव्य है।
अदालत ने पब्लिक हेल्थ पर ज्यादा जोर दिया।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में खतरनाक एयर क्वालिटी का हवाला देते हुए, अदालत ने बताया कि एक एयर प्यूरीफायर की कीमत 10,000 रुपए से 15,000 रुपए तक हो सकती है, और सरकार से पूछा कि टैक्स को उस लेवल तक कम क्यों नहीं किया जा सकता, जिससे गरीब वर्ग भी इस खरीद सकें।
यह याचिका वकील कपिल मदन ने दायर की थी, जिन्होंने यह तर्क दिया कि यह कोई विवादित याचिका नहीं है और संबंधित अधिसूचनाओं, यानी अनुसूची I, जिस पर पांच प्रतिशत GST लागू होता है, को सरसरी तौर पर पढ़ने से ही पता चलता है कि एयर प्यूरीफायरों पर गलत कैटेगरी के तहत कर लगाया जा रहा है।
जब अदालत ने ASG से पूछा कि परिषद इस संबंध में निर्णय क्यों नहीं ले सकती, तो उन्हें बताया गया कि इस मुद्दे पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश विचाराधीन है।