Chandigarh Controversy: केंद्र सरकार के 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाने के प्रस्ताव से पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। दरअसल इस विधेयक का उद्देश्य चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाना है, जो राष्ट्रपति को केंद्र शासित प्रदेश के लिए सीधे नियम बनाने का अधिकार देता है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे 'पंजाब के अधिकारों पर हमला' बताते हुए कड़ा विरोध किया है, जबकि BJP ने पलटवार करते हुए इसे 'राजनीतिक रूप से प्रायोजित विवाद' करार दिया है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्या है ये संसोधन और इसके प्रभावी होने से क्या बदलेगा।
'पंजाब से चंडीगढ़ को छीनने की साजिश कर रही केंद्र सरकार'
AAP नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे पंजाब के अधिकारों पर हमला और चंडीगढ़ को राज्य से 'छीनने' की साजिश करार दिया। मान ने बार-बार जोर दिया है कि 'चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न अंग था, है और रहेगा'।
वहीं SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इस प्रस्ताव को संघीय ढांचे पर 'पंजाब विरोधी हमला' बताते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने ऐलान किया कि यह विधेयक 'चंडीगढ़ पर पंजाब के वैध दावे को ध्वस्त करने' का प्रयास है। इस कदम पर निर्णायक प्रतिक्रिया तय करने के लिए अकाली दल ने सोमवार, 24 नवंबर को दोपहर 2 बजे पार्टी मुख्यालय में आपातकालीन कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। बादल ने पंजाबियों को आश्वासन दिया है कि पार्टी इस विधेयक को सफल नहीं होने देगी और राजनीतिक तथा संवैधानिक लड़ाई लड़ेगी।
अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब ने गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर सद्भावना की उम्मीद की थी, लेकिन इस प्रस्तावित संशोधन ने पंजाबियों को स्तब्ध कर दिया है। कोर कमेटी कानूनी रूप से मजबूत रणनीति तैयार करने के लिए वरिष्ठ संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह लेगी।
'सिर्फ विरोध के लिए हो रहा विरोध': BJP का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी ने इस विवाद को राजनीतिक रूप से प्रायोजित बताते हुए विपक्ष पर हमला किया। BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने AAP पर 'गलत सूचना फैलाने' का आरोप लगाया और तर्क दिया कि चंडीगढ़ को पूर्ण केंद्र शासित प्रदेश बनाने से केवल उसका आर्थिक विकास तेज होगा। उन्होंने कहा कि UT का दर्जा मिलने से केंद्र अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह यहां भी फंड लाकर विकास परियोजनाओं को अधिक कुशलता से लागू कर पाएगा, जिससे निवेशकों की अनिश्चितता दूर होगी।
पूर्व BJP सांसद आरपी सिंह ने विवाद को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 240 से जुड़ा संशोधन केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल करेगा, जिससे राष्ट्रपति सीधे निर्णय ले सकेंगे, और इससे मौजूदा कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक संरचना पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सिंह ने कहा कि पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के उपराज्यपाल बने रहेंगे। उन्होंने विपक्षी नेताओं को 'सिर्फ विरोध के लिए विरोध' करने का दोषी ठहराया, क्योंकि उनके पास उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है।
अनुच्छेद 240 में क्या है?
अनुच्छेद 240 भारतीय संविधान का एक प्रावधान है जो भारत के राष्ट्रपति को कुछ विशेष केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियम बनाने और सीधे कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति राष्ट्रपति को उस क्षेत्र के विकास और सुशासन के लिए प्राप्त होती है, भले ही वहां कोई स्थानीय विधानमंडल हो या न हो।
विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
संसदीय बुलेटिनों के अनुसार, केंद्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करने की योजना बना रहा है। इस विधेयक में चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के तहत लाने की मांग की गई है, जिससे केंद्र को केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन चलाने के लिए उपराज्यपाल नियुक्त करने का अधिकार मिल जाएगा। इस कदम को चंडीगढ़ पर पंजाब के ऐतिहासिक और राजनीतिक दावे को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्तमान में पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी है।