पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन की सच्चाई सामने आ गई है। चीन पाकिस्तान के सीपीईसी में बड़ा निवेश कर रहा है। इधर, इंडिया के साथ भी उसका व्यापार बढ़ रहा है। इस बीच इंडिया के समर्थन वाला आईएमईसी चीन के बेल्ट एंड रोड एनिशिएटिव (बीआरआई) के प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरा है। 14वें वित्त आयोग के सदस्य और इकोनॉमिस्ट एम गोविंद राव ने कहा कि चीन हमेशा से इंडिया की बढ़ती प्रतिस्पर्धी क्षमता को रोकने की कोशिश करता आ रहा है। चीन ने दरअसल पाकिस्तान में काफी निवेश किया है। वह पाकिस्तान का स्थायी दोस्त बने रहना चाहता है।
बीआरआई को नया सिल्क रूट भी कहा गया है
BRI को नया सिल्क मार्ग भी कहा गया है। यह चीन को दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से कनेक्ट करता है। इंडिया और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद चीन की डिफेंस कंपनियों के शेयरों में गिरावट दिखी। 13 मई को चाइनीज डिफेंस कंपनियों के शेयरों की कीमतें 9 फीसदी तक क्रैश कर गईं। उधर, चीन खुलकर पाकिस्तान के समर्थन में आया। चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश हर कीमत पर पाकिस्तान का समर्थन करेगा। हालांकि, इस बयान पर इंडिया को कोई हैरानी नहीं हुई।
चीन के समर्थन में पाकिस्तान के आने से इंडिया को हैरानी नहीं
इंडिया यह मानता रहा है कि चीन हर कीमत पर पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देगा। पाकिस्तान को चीन से मिलने वाली मदद सिर्फ रक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका नाता इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेटेजी से भी है। बताया जाता है कि चीन ने पाकिस्तान में CPEC में 60-70 अरब डॉलर का निवेश किया है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में चाइना स्टडीज के प्रोफेसर श्रीपर्ण पाठक ने कहा कि चीन का सीपीईसी कोई इकोनॉमिक कॉरिडोर नहीं है बल्कि इसका स्ट्रेटेजिक रोल है।
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सीपीईसी चीन की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए जरूरी है
जेएनयू में सिक्योरिटी स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर अमित सिंह ने कहा कि सीपीईसी का मकसद समुद्र और जमीन पर एक ऐसा कॉरिडोर बनाना है, जो पश्चिमी इलाके को पाकिस्तान और जबरन कब्जे वाले पीओके रास्ते अरब सागर से जोड़ता है। इंडिया ने हमेशा सीपीईसी का विरोध किया है। इंडिया पाकिस्तान के अपने इलाके को वापस हासिल करना चाहता है। सीपीईसी और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर चीन की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए जरूरी है।