कांग्रेस को '24 अकबर रोड' बंगला खाली करने का नोटिस! 48 सालों से रहा पार्टी का मुख्यालय, राजधानी में सियासी गर्मी बढ़ी

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार ने एक और 5 रायसीना रोड स्थित 'भारतीय युवा कांग्रेस' (IYC) के दफ्तर को भी खाली करने को कहा है। कांग्रेस अब इस मामले में कानूनी राहत पाने के लिए अदालत जाने पर विचार कर रही है

अपडेटेड Mar 25, 2026 पर 2:45 PM
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कांग्रेस को '24 अकबर रोड' बंगला खाली करने का नोटिस! 48 सालों से रहा पार्टी का मुख्यालय

सरकार ने देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को आदेश दिया है कि वह शनिवार तक अपना मशहूर दफ्तर '24 अकबर रोड' खाली कर दे। यह बंगला पिछले 48 सालों से कांग्रेस का मुख्यालय रहा है। पिछले साल कांग्रेस ने कोटला मार्ग पर अपने नए दफ्तर 'इन्दिरा भवन' का उद्घाटन किया था। नया दफ्तर बनने के बावजूद कांग्रेस ने अभी तक अकबर रोड वाला बंगला खाली नहीं किया है और पार्टी की गतिविधियां अभी भी वहीं से चल रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार ने एक और 5 रायसीना रोड स्थित 'भारतीय युवा कांग्रेस' (IYC) के दफ्तर को भी खाली करने को कहा है। कांग्रेस अब इस मामले में कानूनी राहत पाने के लिए अदालत जाने पर विचार कर रही है।

कांग्रेस ने नोटिस को बताया 'अवैध'


कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंहवी ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे "अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित" बताया है और कहा है कि पार्टी सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेगी।

उन्होंने कहा, "यह गैरकानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, और इन नोटिसों के खिलाफ सभी कानूनी उपाय किए जाएंगे।"

पार्टी नेता प्रमोद तिवारी ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार लोकतांत्रिक सरकार नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें नोटिस मिलने दीजिए। हम चर्चा के बाद इस पर कार्रवाई करेंगे।"

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने कहा, "अगर वे इस सिद्धांत को कांग्रेस पार्टी पर लागू करना चाहते हैं, तो इसे सभी अन्य राजनीतिक दलों पर भी लागू किया जाना चाहिए। यह एकतरफा नहीं हो सकता।"

'24 अकबर रोड'का ऐतिहासिक सफर: ब्रिटिश राज से अब तक

24 अकबर रोड सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास का गवाह है।

आजादी से पहले: यहां ब्रिटिश राज के दौरान वायसराय की काउंसिल के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल रहा करते थे।

म्यांमार का कनेक्शन: 1960 के दशक में यह बंगला भारत में म्यांमार की राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास था। उनकी बेटी और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने भी अपने जीवन के कई साल इसी घर में बिताए हैं।

कांग्रेस का 'लकी' ऑफिस: 1977 के चुनावों में करारी हार के बाद जब कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई, तब इंदिरा गांधी के वफादार सांसद जी. वेंकटस्वामी ने उन्हें यह बंगला काम करने के लिए दिया था।

सत्ता का केंद्र: इसी बंगले ने कांग्रेस की शानदार वापसी देखी। राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान यही बंगला देश की राजनीति का मुख्य केंद्र रहा।

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