ED ने ममता बनर्जी के खिलाफ खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, बंगाल प्रशासन पर लगाया धमकाने और जांच में बाधा डालने का आरोप

ED Plea Supreme Court: ED ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़े प्रहार किए है। याचिका में मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर का भी नाम लिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर उन परिसरों में प्रवेश किया जहां PMLA के तहत तलाशी चल रही थी

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 11:51 AM
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ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और उनके साथ आए अधिकारियों ने जांच अधिकारियों को धमकाया और उनके हाथ से इलेक्ट्रॉनिक सबूत व फाइलें छीन लीं

West Bengal: ED ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ED ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC से जुड़ी तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच में बाधा डाली। अब ED ने इस मामले की CBI जांच की मांग की है।

'कानून को हाथ में लेना एक पैटर्न बन गया है'

ED ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़े प्रहार किए है। जांच एजेंसी का दावा है कि जब भी किसी जांच से मुख्यमंत्री की 'नापसंद' के तथ्य सामने आते है, वह राज्य पुलिस और प्रशासन का उपयोग करके उसे रोकने की कोशिश करती हैं। याचिका में मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर का भी नाम लिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर उन परिसरों में प्रवेश किया जहां PMLA के तहत तलाशी चल रही थी।


'हाथ से छीन लिए गए सबूत'

ED ने कोर्ट को बताया कि वे ₹2,742 करोड़ के अवैध कोयला खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे थे, जिसमें I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के पास ₹20 करोड़ के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' होने का सुराग मिला था। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और उनके साथ आए अधिकारियों ने जांच अधिकारियों को धमकाया और उनके हाथ से इलेक्ट्रॉनिक सबूत व फाइलें छीन लीं, जिन्हें कानूनन जब्त किया जा चुका था।

एजेंसी ने कहा कि जब देश के उच्च पदों पर बैठे लोग सरेआम सबूत छीनते हैं और उसका मीडिया में प्रदर्शन करते हैं, तो यह सीधे तौर पर 'संविधान और कानून के शासन का अपमान' है।

CCTV कैमरों की जब्ती और साक्ष्यों को किया नष्ट

ED ने बंगाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए है। ED का दावा है कि बंगाल पुलिस ने FIR के नाम पर उन CCTV कैमरों को जब्त कर लिया, जिनमें मुख्यमंत्री और अधिकारियों द्वारा बाधा डालने की पूरी रिकॉर्डिंग थी। इसे 'साक्ष्यों को नष्ट करने' की कोशिश बताया गया है। एजेंसी ने कहा कि केंद्रीय अधिकारियों को डराने के लिए उनके खिलाफ झूठी और कई FIR दर्ज की जाती हैं ताकि वे भविष्य में जांच न कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

याचिका में इस मामले को दुर्लभ और असाधारण बताते हुए कहा गया है कि, स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है। चूंकि खुद बड़े पुलिस अधिकारी इस घटना में शामिल थे, इसलिए स्थानीय पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। ED ने कोलकाता हाई कोर्ट में हुई नारेबाजी और हंगामे का भी जिक्र किया, जिसके कारण वहां सुनवाई नहीं हो सकी थी।

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