देश के शहरी इलाकों में एक नया सामाजिक बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में युवा शादी तो कर रहे हैं। लेकिन बच्चे पैदा करने का फैसला टाल रहे हैं। या फिर एक ही बच्चे तक सीमित रहने का विकल्प चुन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे महंगी शिक्षा, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की बढ़ती कीमतें, नौकरी की अनिश्चितता और बदलती जीवनशैली जैसे कई कारण हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्थिक दबाव भारत की जनसांख्यिकी को भी प्रभावित कर रहा है?
