Delhi BMW Crash: समय पर इलाज नहीं मिलने से वित्त मंत्रालय के अधिकारी नवजोत सिंह की गई जान, चार्जशीट में दिल्ली पुलिस का दावा

Delhi BMW Crash Chargesheet: दिल्ली पुलिस ने 400 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें कहा गया है कि सितंबर 2025 में धौला कुआं के पास एक तेज रफ़्तार BMW से कुचले गए 52 वर्षीय अधिकारी कम से कम 15 मिनट तक जिंदा थे। इसमें कहा गया है कि समय पर मेडिकल केयर मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती थी

अपडेटेड Jan 01, 2026 पर 6:37 PM
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Delhi BMW Crash Chargesheet: वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की सितंबर में तेज रफ्तार BMW से टक्कर में मौत हो गई थी

Delhi BMW Crash Chargesheet: पिछले साल सितंबर में धौला कुआं के पास हुए भीषण सड़क दुर्घटना मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। अपने चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार से कुचले गए वित्त मंत्रालय के 52 वर्षीय अधिकारी नवजोत सिंह दुर्घटना के बाद कम से कम 15 मिनट तक जिंदा थे। अगर उन्हें समय पर इलाज मिली होती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। अंतिम रिपोर्ट पिछले सप्ताह मजिस्ट्रेटी अदालत में दाखिल की गई।

इस दुर्घटना में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में उप सचिव नवजोत सिंह की 14 सितंबर को मौत हो गई थी। जबकि उनकी पत्नी सहित तीन अन्य लोग घायल हो गए थे। यह हादसा उस समय हुआ जब कथित तौर पर एक बीएमडब्ल्यू कार ने रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास सिंह की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग के समक्ष दाखिल 400 पन्नों के आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ ने पीड़ित को समय पर जरूरी मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की।

चार्जसीट के अनुसार, यह दुर्घटना 14 सितंबर को दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई, जब मक्कड़ की BMW X5 कथित तौर पर 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। कार रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक मेट्रो पिलर से टकराकर पलट गईफिर हरि नगर निवासी नवजोत सिंह की मोटरसाइकिल से जा टकराई

चार्जशीट में BMW से मिली स्पीड एनालिसिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है, "तेज रफ्तार के कारण वाहन पर नियंत्रण रखना असंभव हो गया थाबीएमडब्ल्यू बेहद मजबूत गाड़ी होती है और टक्कर भी बहुत भीषण थीटक्कर के प्रभाव से ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीड़ितों को कितनी जोरदार चोट लगी होगी।"

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मक्कड़ घायलों को 10 से 15 मिनट की दूरी पर स्थित पास के अस्पतालों जैसे दिल्ली कैंटोनमेंट अस्पताल या एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ट्रॉमा सेंटर ले जाने के बजाय दुर्घटनास्थल से लगभग 20 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर स्थित न्यूलाइफ अस्पताल ले गया।


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उन्हें अस्पताल पहुंचने में 23 मिनट लग गए। इस देरी के कारण वो कीमती समय बर्बाद हो गया जिसमें पीड़ित की जान बचाई जा सकती थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मक्कड़ के न्यूलाइफ हॉस्पिटल से दूर के पारिवारिक संबंध हैं। वहां पहुंचने में 23 मिनट लगे। पुलिस ने पहले दावा किया था कि दुर्घटना के कुछ मिनट बाद ही ड्राइवर और पैरामेडिक के साथ एक एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन आरोपी ने उनकी मदद लेने से इनकार कर दिया।

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