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Delhi Building Collapse: ₹32 हजार किराया, फिर भी मालिक का पता नहीं! दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच रह रहे थे छात्र

Delhi Building Collapse: 'अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें...' राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में अपने 21 वर्षीय बेटे अर्पित जाज को खोने के बाद उसे अंतिम विदाई देने वाले देवास के भूपेंद्र जाज ने मंगलवार (8 सितंबर) को दोनों हाथ जोड़कर अभिभावकों से यह भावुक अपील की

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Sep 08, 2026 पर 4:41 PM
Delhi Building Collapse: ₹32 हजार किराया, फिर भी मालिक का पता नहीं! दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच रह रहे थे छात्र
Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच छात्र रह रहे थे

Delhi Building Collapse: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत के ढहने से 7 छात्रों की मौत और 5 लोगों के घायल होने के बाद इलाके में चल रहे PG और किराए के मकानों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां रहने वाले कई छात्रों का कहना है कि वे हजारों रुपये किराया देने के बावजूद अपने मकान मालिक तक को नहीं जानते। ज्यादातर मामलों में छात्रों का संपर्क सीधे मालिक से नहीं, बल्कि ब्रोकर या बिचौलियों से होता है। छात्रों के मुताबिक, मकान मालिक सामने नहीं आते और किसी समस्या की स्थिति में ब्रोकर ही उनका एकमात्र सहारा होता है। इसके चलते कई बार खराब रखरखाव, पानी की समस्या और जर्जर इमारतों जैसी शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

'टूटी दीवारें थीं, सीढ़ियां भी खराब थीं'

सत्य निकेतन की जिस इमारत के गिरने से सात लोगों की जान गई, उसमें पहले रह चुके यशवंत वेमानंद रेड्डी रेड्डम ने 'CNN न्यूज 18' को बताया कि वह 2024 में इस इमारत में रहते थे। बाद में जब वहां मरम्मत का काम शुरू होना था, तो उन्होंने कमरा खाली कर दिया। उन्होंने बताया कि इमारत के ऊपर की मंजिल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में थी। लेकिन नीचे की कई मंजिलें काफी पुरानी थीं। वहां रहना बेहद मुश्किल था। दीवारें टूटी हुई थीं। संकरी सीढ़ियों का रखरखाव ठीक से नहीं होता था। पूरी इमारत की हालत खराब थी।

सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि इमारत का असली मालिक कौन है। वे सिर्फ उन बिचौलियों को जानते थे, जिनके जरिए उन्हें रहने की जगह मिली थी। रेड्डी के मुताबिक, इमारत के कुछ हिस्से पहले से ही खराब थे। बाद में मरम्मत के बाद किराया बढ़ा दिया गया। फिर आखिरकार इमारत ढह गई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई।

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