आपके टूथ पेस्ट में 'जहर' है! दिल्ली में 'नकली' Sensodyne बनाने वाली फैक्ट्री का भांडाफोड़, 2100 ट्यूब बरामद
Fake Sendosyne: फैक्ट्री से बरामद की गईं सभी ट्यूब बिल्कुल असली जैसी लग रही थीं। Sensodyne का ब्रांडिंग भी सही था। लेकिन अंदर सस्ते केमिकल, नीले ब्लीचिंग एजेंट और लोकल फ्लोराइड मिक्सचर भरा जा रहा था। पुलिस ने कहा कि फैक्ट्री हालत बेहद खराब और गंदी थी
Fake Sensodyne: दिल्ली में 'नकली' Sensodyne बनाने वाले फैक्ट्री का भांडा फोड़, 2100 ट्यूब बरामद
हर सुबह लाखों भारतीयों की शुरुआत अपने दांत साफ करने से होती है। हम सभी ये सोचते हैं कि जिस टूथपेस्ट से हम अपने दांतों को चमका रहे हैं और मजबूत बना रहे हैं, वो सबसे बेहतर है। लेकिन जरा सोचिये अगर आपको पता चले कि जिस पेस्ट से आप अपने दांत साफ कर रहे हैं, वो असल एक जहर है! दिल्ली के कंझावाला इलाके में ऐसे ही नकली टूथपेस्ट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस गंदी फैक्ट्री में नकली Sensodyne टूथपेस्ट भरा जा रहा था, जो फिर पड़ोस की दुकानों तक पहुंच रहा था।
छापेमारी के पीछे की कहानी: धोखे पर टिकी फैक्ट्री
ट्यूब बिल्कुल असली जैसी लग रही थीं। Sensodyne का ब्रांडिंग भी सही था। लेकिन अंदर सस्ते केमिकल, नीले ब्लीचिंग एजेंट और लोकल फ्लोराइड मिक्सचर भरा जा रहा था। पुलिस ने कहा कि फैक्ट्री हालत बेहद खराब और गंदी थी।
शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने रोहिणी के 58 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया और छह मजदूरों को हिरासत में लिया। ये लोग नकली टूथपेस्ट बनाने की फैक्ट्री चला रहे थे।
छापेमारी गुरुवार को एक सूचना मिलने के बाद हुई। पुलिस को एक नकली फैक्ट्री मिली- ट्यूब भरने की मशीनें, हीटिंग गन, सील करने का सामान और सस्ते केमिकल से भरे ड्रम मिले। सब कुछ दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी इलाके में चुपचाप चल रहा था और हर सुबह ये टूथपेस्ट लोगों के मुंह तक पहुंच रहा था।
पकड़े गए माल की भारी मात्रा
संख्या देखकर हैरानी होती है। पुलिस ने बरामद किया:
- 2,100 भरे हुए ट्यूब, जो बिकने को तैयार थे
- 10,472 खाली ट्यूब Sensodyne पैकिंग वाली, भरने को तैयार
- 200 कार्टन, जो भेजने के लिए थे
- 6 ड्रम केमिकल
- कुल मिलाकर 13,000 से ज्यादा Sensodyne ब्रांड वाले ट्यूब
DCP (क्राइम) पंकज कुमार ने बताया कि मटेरियल की जांच हुई और पुष्टि हुई कि अनधिकृत केमिकल इस्तेमाल किए जा रहे थे। “फैक्ट्री के अंदर का माल गंदे वातावरण में बना रहा था, जिससे वो इस्तेमाल के लायक नहीं था। आरोपी कोई वैध दस्तावेज, बिल, लाइसेंस या परमिशन नहीं दिखा सके।”
फैक्ट्री से आपके बाथरूम शेल्फ तक
पुलिस के मुताबिक आरोपी लोकल मार्केट से सस्ता फ्लोराइड मिक्सचर खरीदता था, उसे Sensodyne वाले ट्यूब में भरता-सील करता और रोहिणी, वेस्ट दिल्ली और आसपास की दुकानों पर भेज देता था। ये कारोबार छोटा, सस्ता और गुरुवार तक पूरी तरह छिपा हुआ था।
सबसे डरावनी बात ये है कि ये प्रोडक्ट गली-कूचों में नहीं बिक रहा था। ये नॉर्मल दुकानों के जरिए बिक रहा था, असली Sensodyne के बगल में शेल्फ पर रखा होता, और नंगी आंखों से पहचानना मुश्किल था।
पुलिस ने कहा कि अब दूसरे साथियों और कच्चे माल के सप्लायर्स की तलाश में छापेमारी चल रही है।
'ये देश ऑटोपायलट पर चल रहा है'
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया गुस्से और निराशा के बीच घूम रही थी।
एक यूजर ने चेतावनी दी: “Amazon से Sensodyne मत खरीदना। अनवेरिफाइड सेलर्स नकली प्रोडक्ट बेच रहे हैं।”
एक और यूजर ने आगे लिखा: “कोई नोटिस नहीं कर रहा था क्योंकि असली Sensodyne में भी शायद कोई असरदार चीज नहीं होती। बस फैंसी पैकेट में चॉक और पानी भरा होता है।”
कई लोगों ने सख्त सजा की मांग की। एक यूजर ने PMO को टैग करते हुए लिखा: “खाने-पीने की चीजों और दवाओं में मिलावट के लिए फांसी की सजा होनी चाहिए।”
वहीं एक और यूजर ने निराशा जताते हुए लिखा: “ये देश ऑटोपायलट पर चल रहा है। अगला दिन देखने को मिले, तो खुद को लकी मानो। कुछ भी ठीक नहीं होगा, जब तक सरकार उम्रकैद जैसी सजाएं देना शुरू न कर दे।”
सिर्फ दिल्ली नहीं, पूरा देश मिलावट से जूझ रहा है
कंझावाला की ये छापेमारी कोई अकेली घटना नहीं है। पूरे भारत में हाल के हफ्तों में रोजमर्रा की चीजों में नकली और मिलावटी सामान पकड़ा जा रहा है।
हैदराबाद, अप्रैल 2026: हैदराबाद पुलिस ने खाने की मिलावट के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” अभियान शुरू किया। एक महीने में ही 15,000 किलो गंदा माल जब्त किया गया- नकली घी, मिलावटी अदरक-लहसुन पेस्ट, फेक पनीर और बेहद गंदी हालत में बनी चीजें।
तेलंगाना, मार्च 2026: मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मिलावट रोकने के लिए खास सरकारी तंत्र बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये ड्रग्स और अतिक्रमण रोकने वाली टीमों जैसा होना चाहिए- ये दिखाता है कि समस्या कितनी गंभीर हो गई है।
महाराष्ट्र, फरवरी 2026: फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पाया कि लोग नकली पनीर और चीज बेचे जा रहे हैं। खासकर बच्चों में ये बहुत पॉपुलर है।
भारत में अभी कोई ऐसा कानून नहीं है, जो मिलावट के लिए लोगों की मांग के मुताबिक सख्त सजा दे। मौजूदा कानून में खाने की मिलावट के लिए ज्यादा से ज्यादा 6 महीने की सजा है। संसदीय पैनल ने भी इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सख्त सजा की सिफारिश की थी। फिलहाल कंझावाला में नकली टूथपेस्ट भरने वालों को भी वही सजा मिल सकती है, जो दूध में पानी मिलाने वाले को मिलती है।