Delhi Water Supply Disruption: पानी के लिए तरसेंगे दिल्ली के लोग, इन इलाकों में दो दिन तक बाधित रहेगी जल आपूर्ति, DJB ने जारी की चेतावनी
Delhi Water Supply Disruption: दिल्ली जल बोर्ड ने राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को दो दिन की जल आपूर्ति बाधित होने की चेतावनी देते हुए एक परामर्श जारी किया है। दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि हिंदू राव रिजर्वॉयर से जुड़े इलाकों में 9 और 10 जनवरी को पानी की कमी हो सकती है।
पानी के लिए तरसेंगे दिल्ली के लोग, इन इलाकों में दो दिन तक बाधित रहेगी जल आपूर्ति, DJB ने जारी की चेतावनी
Delhi Water Supply Disruption: दिल्ली जल बोर्ड ने राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को दो दिन की जल आपूर्ति बाधित होने की चेतावनी देते हुए एक परामर्श जारी किया है। दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि हिंदू राव रिजर्वॉयर से जुड़े इलाकों में 9 और 10 जनवरी को पानी की कमी हो सकती है।
X पर एक पोस्ट में, दिल्ली जल बोर्ड ने कहा, "चंद्रावल वाटर वर्क्स के अंतर्गत आने वाले रिजर्वॉयर की सालाना सफाई (फ्लशिंग) का काम 2025-26 के लिए तय कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा।” इस वजह से कुछ इलाकों में अस्थायी रूप से पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी।
!!Water Alert!! The annual flushing programme of reservoirs under the command area of Chandrawal Water Works for the year 2025-26 will be carried out as per the following schedule: Affected Area: Hindu Rao Reservoir Date: 9 Jan 2026 to 10 Jan 2026@CMODelhi@gupta_rekha… pic.twitter.com/zXMCWsDtKe
चंद्रावल वाटर वर्क्स के अंतर्गत आने वाले रिजर्वॉयर की 2025–26 की सालाना सफाई योजना के चलते अस्थायी जल आपूर्ति बाधित हुई है। दिल्ली जल बोर्ड ने बताया है कि हिंदू राव रिजर्वॉयर से जुड़े इलाकों में 9 और 10 जनवरी को पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी। इस दौरान नीचे दिए गए क्षेत्रों में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए लोगों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है।
चांदनी चौक, लाहौरी गेट, पीली कोठी, कश्मीरी गेट, सेंट स्टीफन अस्पताल, हिंदू राव अस्पताल, सिविल लाइंस, नया बाजार बूस्टर पंपिंग स्टेशन, नया बांस, मोरी गेट, तीरथ राम अस्पताल, राजपुर रोड, बंगला रोड और सराय फूस।
यह कदम इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से करीब 16 लोगों की मौत के बाद उठाया गया है। इंदौर में हुई इस घटना के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को कई निर्देश जारी किए हैं: जिसमें कहा गया है कि “सभी जल आपूर्ति पाइपलाइनों का नियमित निरीक्षण तेज किया जाए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पीने के पानी की लाइनें सीवर लाइनों के पास से गुजरती हैं, ताकि किसी भी तरह के लीकेज, टूट-फूट या गंदे पानी के मिल जाने का खतरा दिखे तो उसे तुरंत ठीक किया जाए।
कब-कब रहेगी जल आपूर्ति बाधित?
राजधानी के कई अन्य क्षेत्रों में शुक्रवार और शनिवार को पानी की सप्लाई बंद रहेगी, क्योंकि "6 स्थानों पर नई बिछाई गई 900 मिमी व्यास की ख्याला मुख्य पाइपलाइन के इंटरकनेक्शन का काम चल रहा है।" प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की सूची इस प्रकार है:
इंदरपुरी, टोडापुर गांव, नरायणा विलेज-विहार, कृषि कुंज, मानसरोवर गार्डन, राजौरी गार्डन, कीर्ति नगर, पंजाबी बाग, तिलक नगर, ख्याला, विष्णु गार्डन, जे जे कॉलोनी ख्याला, रवि नगर और चांद नगर समेत कई इलाकों में शुक्रवार-शनिवार को पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की आंतरिक जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि उसके लगभग 60% उपभोक्ताओं को उनके घरों पर पानी के बिल नहीं मिल रहे हैं। इससे बिलिंग सिस्टम में प्रशासनिक खामियां उजागर होती हैं और पूरे सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है।
दिल्ली के जल मंत्री ने क्या कहा?
अधिकारियों के अनुसार, खराब बिलिंग व्यवस्था की वजह से सरकार की जल बिल माफी योजना पर भी असर पड़ा है, क्योंकि कई उपभोक्ताओं को अपने बकाया बिल की जानकारी ही नहीं है। गुरुवार को दिल्ली के जल मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि मौजूदा प्रणाली पुरानी और अप्रभावी है।
समय पर और सटीक बिलिंग को उपभोक्ता जागरूकता और राजस्व वसूली दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए, परवेश वर्मा ने कहा, “हम डीजेबी की पुरानी बिलिंग प्रणाली में पूरी तरह से बदलाव करने की योजना बना रहे हैं।” हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में, केवल लगभग 40% पंजीकृत ग्राहकों को ही पानी का बिल मिल रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “कई परिवारों को अपने बिल के बकाया होने की जानकारी नहीं है। कई लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें वर्षों तक बिल नहीं मिलते, और फिर अचानक उन्हें एक बड़ी राशि का बिल मिलता है। इसलिए, सिस्टम को अधिक कुशल बनाने के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव की आवश्यकता है।”
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में लगभग 29 लाख पंजीकृत जल कनेक्शन हैं, जो राजधानी में वास्तविक परिवारों की संख्या से कहीं कम है।