Drone import bribe case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक अन्य निजी कंपनी के लिए ड्रोन आयात करने के लाइसेंस के बदले कथित तौर पर 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में एक प्रमुख कॉरपोरेट समूह के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भरत माथुर और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) में 'एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट' के डिप्टी डायरेक्टर जनरल को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को की गई कार्रवाई में सीबीआई ने DGCA में 'एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट' के डिप्टी डीजी मुदावथ वुला और ड्रोन टेक्नोलॉली से जुड़ी कंपनी एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के भरत माथुर को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत माथुर, देवुला और एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रमुख कॉर्पोरेट समूह में माथुर काम कर रहे थे, उसे FIR में नामजद नहीं किया गया है। एस्टेरिया एयरोस्पेस के 2024-25 के वित्तीय विवरणों के अनुसार, वह एस्टेरिया एयरोस्पेस की मूल कंपनी है।
दिल्ली में चार ठिकानों पर रेड
CBI ने दिल्ली में आरोपियों से जुड़े चार ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन छापों के दौरान, अधिकारियों ने 37 लाख रुपये कैश, साथ ही सोने और चांदी के सिक्के और कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए। उन्हें जांच के हिस्से के तौर पर अपनी हिरासत में ले लिया गया है।
एस्टेरिया एयरोस्पेस या कॉर्पोरेट ग्रुप की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि आरोपी डीजीसीए के अधिकारी ने कथित तौर पर एक निजी एयरोस्पेस कंपनी के लिए DGCA के पास लंबित आवेदनों की मंजूरी और संबंधित आदेश जारी करने के बदले में निजी व्यक्तियों से अनुचित लाभ की मांग की थी।
उन्होंने बताया, "केंद्रीय एजेंसी ने नई दिल्ली स्थित डीजीसीए मुख्यालय में एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट के डिप्टी डीजी को एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि के साथ 2.5 लाख रुपये के रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की पूरी राशि भी जब्त कर ली गई है।"
बयान में कहा गया है कि सीबीआई ने दिल्ली में चार स्थानों पर आरोपी अधिकारी और अन्य निजी व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली। इस दौरान 37 लाख रुपये की कैश के साथ-साथ सोने और चांदी के सिक्के और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
सीबीआई की ओर से दाखिल प्रतिक्रिया के मुताबिक, यह मामला एक विश्वसनीय सूत्र से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था। इसमें दावा किया गया था कि देवुला ने कथित तौर पर विभिन्न निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत करके अनुमोदन और अनुमतियों के अनुदान से संबंधित मामलों में अनुचित लाभ के बदले में भ्रष्ट और अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं।
FIR के मुताबिक सीबीआई को जानकारी मिली कि माथुर ने 18 मार्च को देवुला से संपर्क कर एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के ड्रोन आयात से संबंधित कुछ आवेदनों की स्थिति के बारे में पूछताछ की थी। इसके मुताबिक दो दिन बाद, देवुला ने कथित तौर पर माथुर से शामिल आवेदनों की संख्या के बारे में पूछा, जिस पर माथुर ने पुष्टि की कि एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड से संबंधित तीन आवेदन थे।
CBI की एफआईआर के मुताबिक, "दोनों के बीच यह तय हुआ था कि फाइल को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत के तौर पर प्रति फाइल पांच लाख रुपये देने होंगे।" सीबीआई के मुताबिक इसमें आगे कहा गया है कि माथुर और देवुला के बीच 17 अप्रैल को यहां एक बैठक हुई थी, जहां देवुला ने उसी दिन काम पूरा होने का आश्वासन दिया था।