Dharmendra Pradhan: अब पीएम मोदी के भाषण पढ़ें उर्दू में, धर्मेंद्र प्रधान ने लॉन्च की ‘खुत्बत-ए-मोदी’ पुस्तक

Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में दिल्ली में "खुत्बत-ए-मोदी: लाल किले की फसील से" नामक पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 से 2025 के बीच लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषणों का संकलन है।

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 2:01 PM
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अब पीएम मोदी के भाषण पढ़ें उर्दू में, धर्मेंद्र प्रधान ने लॉन्च की ‘खुत्बत-ए-मोदी’ पुस्तक

Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में दिल्ली में "खुत्बत-ए-मोदी: लाल किले की फसील से" नामक पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 से 2025 के बीच लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषणों का संकलन है।

यह किताब उर्दू भाषा में प्रकाशित की गई है और इसे राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (NCPUL), नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। NCPUL शिक्षा मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय संस्था है, जिसका उद्देश्य देशभर में उर्दू भाषा को बढ़ावा देना, संरक्षित करना और फैलाना है। यह पुस्तक विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री के विचारों को उर्दू भाषी जनता तक पहुंचाती है।

पुस्तक के प्रकाशन पर धर्मेंद्र प्रधान ने जताई खुशी


इस मौके पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने “खुत्बत-ए-मोदी” का उर्दू में प्रकाशन होने पर खुशी जताई और इसे भाषाई समावेशन की दिशा में एक अहम कदम बताया। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषणों में अंत्योदय (सर्वोच्च व्यक्ति का उत्थान), गरीबों का कल्याण, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय एकता और 14 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं जैसी पहलों पर जोर दिया जाता है, जो नए भारत की परिकल्पना को प्रतिबिंबित करती हैं।

प्रधान ने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन नागरिकों को प्रधानमंत्री के विचारों, विकासात्मक प्राथमिकताओं और परिकल्पना से सीधे जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं, जिससे व्यापक जनभागीदारी और सार्थक चर्चा संभव हो पाती है।

छात्रों, शोधकर्ताओं को मिलेगी मदद

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह किताब देशभर की लाइब्रेरी में जगह बनाएगी, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और पाठकों को विकसित भारत के विजन पर व्यापक चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

मंत्री ने आगे इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय एवं बाल विकास परिषद (NCPUL) को भारत की विरासत, संस्कृति, जीवनशैली और ज्ञान परंपराओं से संबंधित उर्दू में रचनाओं के प्रकाशन की जिम्मेदारी सक्रिय रूप से निभानी चाहिए। प्रधान ने इस सराहनीय पहल के लिए NCPUL को बधाई दी और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।

X पर पोस्ट कर दी जानकारी

शायद पहली बार, प्रधान ने यह जानकारी X पर एक पोस्ट के माध्यम से साझा की। NCPUL के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने कहा कि परिषद ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषणों को उर्दू भाषी जनता के लिए उपलब्ध कराया है और इससे उनके संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित करने में काफी मदद मिलेगी।

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