Get App

El Nino Impact: क्या भारत के मछली मार्केट पर भी कहर बनकर टूटने वाला है अल नीनो? फिशिंग इंडस्ट्री पर इसके असर को समझिए

El Nino Impact: हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रशांत महासागर में अल नीनो के विकसित होने और दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान इसके और मजबूत होने की घोषणा की है। इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने भी अल नीनो के उभरने की पुष्टि करते हुए अनुमान जताया था कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसके बेहद मजबूत होने की 63 प्रतिशत संभावना है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 18, 2026 पर 2:55 PM
El Nino Impact: क्या भारत के मछली मार्केट पर भी कहर बनकर टूटने वाला है अल नीनो? फिशिंग इंडस्ट्री पर इसके असर को समझिए
El Nino Impact: क्या भारत के मछली मार्केट पर भी कहर बनकर टूटने वाला है अल नीनो?

El Nino Impact on Indian Fisheries: इस वक्त भारतीय मानसूनस और इसपर डिपेंड खेती किसानी के बीच सबसे अधिक चर्चा अल-नीनो को लेकर हो रही है। ऐसी आशंकाएं उठ रही हैं कि क्या अल नीनो भारत में तांडव मचाएगा? भारत सरकार ने भी इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे 12 राज्य चिन्हित किए गए हैं जिनपर अल नीनो का सर्वाधिक असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टपोस्ट के एक एक्सप्लेनर में बताया गया है कि अल नीनो का खतरा सिर्फ मानसूनी बारिश या खेती पर ही नहीं है बल्कि इसका एक बड़ा और खतरनाक असर मछली बाजार और पूरी फिशिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ सकता है। आइए इस खतरे को समझते हैं।

आपको बता दें कि हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रशांत महासागर में अल नीनो के विकसित होने और दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान इसके और मजबूत होने की घोषणा की है। इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने भी अल नीनो के उभरने की पुष्टि करते हुए अनुमान जताया था कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसके बेहद मजबूत होने की 63 प्रतिशत संभावना है। अब तक अल नीनो के आते ही सिर्फ सूखे, कम बारिश और फसलों के नुकसान पर चर्चा होती रही है लेकिन इसका एक बड़ा असर भारत के समुद्री जीवन और मछुआरों की आजीविका पर पड़ने जा रहा है।

समंदर के भीतर कैसे उथल-पुथल मचाता है अल नीनो?

रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो तब विकसित होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। वैसे तो यह घटना भारत से हजारों किलोमीटर दूर होती है लेकिन यह पूरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर् को बदल देती है। इसके चलते मानसून की बारिश, समुद्र का तापमान और समुद्री उत्पादकता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। मछलियां इन पर्यावरणीय बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। आईआईटी दिल्ली के स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी की असिस्टेंट प्रोफेसर मोनिका मकवाना बताती हैं कि अल नीनो उन ट्रेड विंड्स को कमजोर कर देता है जो समुद्री परिसंचरण और अपवेलिंग (Upwelling - समुद्र की गहराई से पोषक तत्वों का ऊपर आना) को संचालित करती हैं। अरब सागर में समुद्री उत्पादकता पूरी तरह मानसून आधारित अपवेलिंग पर निर्भर है। हवाएं कमजोर होने से सतह के पानी तक पोषक तत्वों की सप्लाई घट जाती है। इससे मछलियों के फूड नेट कमजोर हो जाता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें