विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते लोगों के आपसी संबंधों से जुड़े हैं, न कि मौजूदा सरकार के साथ। न्यूज18 के राइजिंग भारत समिट के दौरान "न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" सेशन में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा, "भारत से ज़्यादा कोई भी देश बांग्लादेश की भलाई नहीं चाहता। हमें उम्मीद है कि बंगलादेश सही दिशा में आगे बढ़ेगा,सही काम करेगा।" "भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के बारे में अपनी चिंता से बंगलादेश की सरकार को अवगत करा दिया है।" विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले कहा था कि 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ़ हिंसा के 2,200 मामले सामने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत का रिश्ता "खास" है।
पिछले साल अगस्त में छात्र संगठनों के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार के पतन और उसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी कार्यवाहक सरकार के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध अब तक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गए। भारत ने बांग्लादेश के हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों पर हमलों से निपटने के अंतरिम सरकार के तरीके की बार-बार आलोचना की है।
यूनुस ने हाल ही में चीनी अधिकारियों के साथ बैठक में यह दावा करके भारत के साथ संबंधों में तनाव को और बढ़ा दिया कि उनका देश दक्षिण एशिया का एकमात्र प्रवेश द्वार है। यूनुस ने कहा, "भारत का पूर्वी हिस्सा,जिसे सात बहनों के नाम से जाना जाता है, चारों ओर से ज़मीन से घिरा हुआ है। उनकी समुद्र तक कोई पहुंच नहीं है। हम इस क्षेत्र में समुद्र के एकमात्र संरक्षक हैं। इससे अपार संभावनाएं खुलती हैं।"
इस बीच, एक सरकारी अधिसूचना जारी करते हुए सरकार ने बुधवार को उस ट्रांस-शिपमेंट सुविधा को समाप्त कर दिया,जिसके तहत बंदरगाहों और हवाई अड्डों के रास्ते में भारतीय भूमि पर स्थित कस्टम स्टेशनों का उपयोग करके बांग्लादेश से तीसरे देशों को माल निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। भारतीय निर्यातकों, मुख्य रूप से परिधान बनाने वाले निर्यातकों ने सरकार से पड़ोसी देश को दी जाने वाली यह सुविधा वापस लेने का आग्रह किया था। इस सुविधा के चलते भूटान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों में बांग्लादेश के माल का निर्यात आसानी से हो पाता था। भारत द्वारा बांग्लादेश को यह सुविधा जून 2020 में प्रदान की गई थी।
पिछले साल अगस्त में छात्र संगठनों के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार के पतन और उसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी कार्यवाहक सरकार के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध अब तक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गए