प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीते शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा किया। पीएम मोदी के इस दौरे पर दोनों देशों के बीच LPG सप्लाई को लेकर अहम समझौता हुआ। इसके अलावा स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर से जुड़े MoU भी साइन किए गए। इस समझौते के तहत ADNOC अब भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार नेटवर्क में करीब 30 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल जमा कर सकेगी। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत की वो 4 अंडरग्राउंड Caves
यह कच्चा तेल आगे चलकर विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में बनी विशाल भूमिगत चट्टानी गुफाओं में रखा जा सकता है। इसके अलावा, चांदीखोल में भविष्य में बनने वाली नई सुविधाओं में भी तेल भंडारण की योजना है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में ये भूमिगत तेल भंडार किसी आपात स्थिति या वैश्विक संकट के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और सप्लाई बनाए रखने के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारत का पहला रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र स्थापित किया गया था। पूर्वी तट पर स्थित इस विशाल भूमिगत गुफा में करीब 1, 33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखा जा सकता है। इस फैसिलिटी को दो बड़े हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्सा देश के रणनीतिक तेल भंडार के लिए सुरक्षित रखा गया है, जबकि दूसरा हिस्सा HPCL के रोजमर्रा के ऑपरेशन में इस्तेमाल होता है। इससे आपात स्थिति में भी तेल की सप्लाई और संचालन लगातार बनाए रखने में मदद मिलती है।
कर्नाटक के मंगलुरु में स्थित ये रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र 1।5 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल इकट्ठा करने की क्षमता रखता है। ये फैसिलिटी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के लिए भी जानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Abu धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) भी यहां अपना कच्चा तेल स्टोर करती है। इससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है।
कर्नाटक के पडूर में स्थित ये सेंटर भारत के पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के पहले चरण का सबसे बड़ा भंडारण स्थल है। यहां चार अलग-अलग कम्पार्टमेंट हैं। इनमें से प्रत्येक की क्षमता (0।625) मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है। ओडिशा के चांदीखोल में बन रही ये नई तेल भंडारण फैसिलिटी करीब 4 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखने के लिए डिजाइन की गई है।