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US-Iran Peace Deal: तेल-गैस संकट से राहत और गिरते रुपये को सहारा मिलने तक...अमेरिका-ईरान डील से भारत को क्या मिला?

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन लंबे संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है। निर्यातकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से पश्चिम एशिया को होने वाले भारत के निर्यात में तेजी आएगी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jun 15, 2026 पर 12:06 PM
US-Iran Peace Deal: तेल-गैस संकट से राहत और गिरते रुपये को सहारा मिलने तक...अमेरिका-ईरान डील से भारत को क्या मिला?
US-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान डील से भारत को बड़ी राहत मिली है

US-Iran Peace Deal: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने या इसके फिर से खुलने से भारत जैसे दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होंगी, माल ढुलाई लागत घटेगी और महंगाई पर दबाव भी कम होगा। इसके अलावा भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने और रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है।

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकीर्ण समुद्री रूट्स वैश्विक तेल आपूर्ति/परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी उत्पादकों के लिए मुख्य निर्यात रूट्स है जो भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं।

फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने के बाद इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल (जिससे पेट्रोल और डीजल बनते हैं) और प्राकृतिक गैस (जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सीएनजी एवं घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग बीमा प्रीमियम और मालभाड़ा दरों में तेज बढ़ोतरी हुई।

उद्योग सूत्रों एवं विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और तनाव में कमी से वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकते हैं। भारत जैसे आयातक देशों के लिए स्थिति बेहतर हो सकती है।

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