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अब दिल्ली के साथ इन शहरों में भी पुरानी गाड़ियों पर होगा एक्शन, 1 नवंबर से आएगा नया नियम

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंगलवार को एक बैठक में फैसला लिया कि 1 नवंबर से दिल्ली और एनसीआर के कुछ जिलों में पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लागू किया जाएगा। यह फैसला दिल्ली सरकार की समीक्षा के बाद लिया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 08, 2025 पर 8:42 PM
अब दिल्ली के साथ इन शहरों में भी पुरानी गाड़ियों पर होगा एक्शन, 1 नवंबर से आएगा नया नियम
1 नवंबर से दिल्ली और एनसीआर में पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लागू किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने अब 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों के लिए एक और सख्त कदम उठाया है। सरकार के ताजा आदेश के मुताबिक, 1 नवंबर 2025 से इस तरह के वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह नियम सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि एनसीआर के पांच जिलों में भी लागू होगा। इससे पहले सरकार ने इन पुराने वाहनों पर चलने से जुड़ा प्रतिबंध हटाने की बात कही थी, लेकिन अब इस फैसले की समीक्षा के बाद फिर से सख्ती बरती जा रही है।

इन पांच शहरों में लागू होगी योजना

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंगलवार को एक बैठक में फैसला लिया कि 1 नवंबर से दिल्ली और एनसीआर के कुछ जिलों में पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लागू किया जाएगा। यह फैसला दिल्ली सरकार की समीक्षा के बाद लिया गया है। इससे पहले दिल्ली सरकार ने राजधानी में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को ईंधन नहीं देने के फैसले को महज दो दिन में वापस ले लिया था। CAQM के मुताबिक तेल बंदी की योजना अब 1 नवंबर 2025 को अन्य पांच शहरों गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, सोनीपत और गौतम बुध नगर के साथ दिल्ली में भी लागू होगी।

अब 1 नवंबर से पुराने वाहनों को नहीं मिलेगा तेल

दिल्ली सरकार के 1 जुलाई से शुरू किए गए पुराने वाहनों पर "ईंधन नहीं" अभियान को अब पूरे एनसीआर में विस्तार दिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने निर्णय लिया है कि 1 नवंबर 2025 से दिल्ली सहित गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत में भी यह नियम लागू होगा। इस फैसले के तहत, 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन किसी भी पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं भरवा सकेंगे। यह कदम प्रदूषण को काबू में लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आयोग का मानना है कि सभी छह शहरों में एक साथ यह नियम लागू करने से इसका असर ज्यादा मजबूत और प्रभावी होगा।

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