Goa Nightclub Fire Case: दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (16 दिसंबर) को गोवा पुलिस को सौरभ और गौरव लूथरा की 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड दे दी। ये दोनों गोवा के 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब के मालिक हैं। इस महीने की शुरुआत में इस नाइट क्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। इस अग्निकांड के तुरंत बाद नाइट क्लब के मालिकों सौरभ और उसके भाई गौरव लूथरा थाईलैंड के फुकेत भाग गए थे। दोनों भाइयों को थाईलैंड से डिपोर्ट किए जाने के बाद मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने गोवा पुलिस को दोनों आरोपियों की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी है।
थाईलैंड से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद मंगलवार को गोवा नाइटक्लब के सह-मालिकों गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा को पटियाला हाउस अदालत में पेश किया गया। 6 दिसंबर को गोवा के ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में भीषण आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। गोवा पुलिस ने लूथरा बंधुओं को ट्रांजिट रिमांड के लिए पटियाला हाउस कोरट् में ड्यूटी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ट्विंकल चावला के समक्ष पेश किया।
इससे पहले, लूथरा बंधुओं के भारत प्रत्यर्पण के बाद गोवा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को चिकित्सा जांच के लिए सफदरजंग अस्पताल भी ले जाया गया था। छह दिसंबर की घटना के बाद लूथरा बंधुओं के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि नाइटक्लब द्वारा अनिवार्य फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने के कारण यह घटना और भी गंभीर हो गई।
गौरव और सौरभ अपने नाइटक्लब में आग लगने के कुछ घंटों बाद सात दिसंबर को तड़के फुकेत भाग गए। इसके चलते इंटरपोल का 'ब्लू कॉर्नर' नोटिस जारी किया गया। फिर उनके पासपोर्ट रद्द कर दिए गए। भारत सरकार के अनुरोध के बाद 11 दिसंबर को थाईलैंड के अधिकारियों ने फुकेत में दोनों को हिरासत में ले लिया। भारत सरकार ने दोनों देशों के बीच कानूनी संधियों के तहत उन्हें प्रत्यर्पित करने के लिए थाईलैंड के अधिकारियों के साथ बातचीत किया।
दिल्ली की एक अदालत ने 11 दिसंबर को लूथरा बंधुओं की ट्रांजिट अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं थी। अतिरिक्त सत्र जज वंदना ने लूथरा बंधुओं के खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर करार देते हुए उनके आचरण की कड़ी आलोचना की।
अदालत ने पुलिस जांच पर गौर किया कि लूथरा बंधुओं ने आग लगने के एक घंटे बाद फुकेट के लिए टिकट बुक कर लिए थे। शुरुआत में इस तथ्य को उनके वकील ने गिरफ्तारी से संरक्षण का अनुरोध करते समय छिपाया था। जज ने कहा कि घटना के तुरंत बाद वहां से चले जाना कानूनी प्रक्रिया से बचने का स्पष्ट प्रयास था।