नॉर्थ गोवा के रोमियो लेन में 'बर्च' नाइटक्लब के मालिक लूथरा बंधुओं को थाईलैंड से प्रत्यर्पित कर मंगलवार को दिल्ली लाया गया। इस नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार, सौरभ और गौरव लूथरा को विमान की आखिरी लाइन में बैठाया गया था और दूसरे यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए उनके साथ भारतीय एजेंसियों के चार से पांच अधिकारी भी मौजूद थे।
विमान बैंकॉक से रवाना हुआ और दोपहर करीब 2 बजे दिल्ली पहुंचा। इससे पहले गोवा पुलिस भी दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद थी, जिसने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड के बाद आज रात तक गोवा ले जाया जाएगा। लूथरा परिवार पर उचित सुरक्षा परमिट के बिना क्लब चलाने का आरोप है।
44 साल के गौरव और 40 के सौरभ लूथरा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि नाइटक्लब अनिवार्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा था, जिससे त्रासदी की भयावहता और बढ़ गई।
फुकेट में 11 दिसंबर को उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद देश से निकाला गया। भारतीय दूतावास ने हस्तक्षेप किया और थाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। भारत सरकार ने दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द कर दिए और थाई अधिकारियों को एक ‘डोजियर’ सौंपा था तथा उन्हें निर्वासित किए जाने का औपचारिक अनुरोध किया था।
आग लगने की घटना के तुरंत बाद देश छोड़कर चले जाने के बाद दोनों भाइयों के खिलाफ इंटरपोल का ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया गया था।
गोवा पुलिस ने इस मामले में नाइटक्लब के पांच प्रबंधकों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच आगे बढ़ने पर और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को ‘बर्च बाय रोमियो लेन’के खिलाफ दायर दीवानी मुकदमे को जनहित याचिका में बदल दिया। अदालत ने कहा कि इस त्रासदी के लिए ‘‘किसी न किसी को तो जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’
भारत और थाईलैंड ने 2013 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो जून 2015 में लागू हुई। इसी संधि के तहत इन दोनों भाइयों को भारत लाया गया है।